शिक्षा के आर्थिक संबंधों के बिना शिक्षण संस्थाओं के बाजारीकरण की प्रक्रिया को समझ पाना मुश्किल है।
खुशियां चंदन की तरह दूसरों के माथे पर सजाई जाएं तो अपनी अंगुलियां महक उठेंगी।
हमें बताया जाता है कि देश जागरूकता और विकास की राह पर लौट गया है।
दूसरों के साथ हमारे अच्छे संबंध यह बताते हैं कि हम कितने मानवीय हैं।
भारत प्लास्टिक प्रदूषण फैलाने के मामले में दुनिया के बीस शीर्ष देशों में शुमार है।
हिंसा की इस बढ़ती प्रवृत्ति के पीछे सामाजिक परिवेश भी एक बड़ा कारण है।
कुछ समय पहले दिल्ली में करीब आधा किलोमीटर लंबी सड़क के किनारे कतार में अमलतास के नन्हे-पीले-सुनहरे फूल शोभायमान दिखे।
दुख और सुख के झूले झूलते इस संसार में हर व्यक्ति किसी न किसी दुख से दुखी है।
एक सामाजिक प्राणी होने के नाते संवाद हमारी जरूरत है।
सांसारिक सुविधाओं का अभाव इतना बड़ा कारण नहीं कि जिसके लिए दुखी हुआ जाए।
विकास हमारी नींव मजबूत करता है, जिस पर भविष्य के सार्थक सपने फलते-फूलते हैं।