Duniya Mere Aage, दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: विवाद की स्थिति में धैर्य और मौन को बनाएं अपनी ढाल, शांत रहकर परिस्थिति को समझना जीवन की सबसे बड़ी कला

शांत रहकर परिस्थिति को समझना और सही समय पर निर्णय लेना जीवन की सबसे बड़ी कला है। यह न केवल…

Duniya mere aage
दुनिया मेरे आगे: दुनिया की पहली मिठाई है शहद, भाषाओं की तरह ही बहुत से जीव भी होते जा रहे हैं विलुप्त

जल, वायु और मृदा- ये तीनों ही पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं। हम अपने जीवन को सुगम और सुरक्षित बनाना…

Dunia Mere Aage, Jansatta Online
दुनिया मेरे आगे: तकनीकी संजाल में गुम होते जा रहे हैं नई उम्र के लोग, स्नेह और प्रेम का महत्त्व अब नहीं रखता मायने

जब उपेक्षित हृदय कहता है कि जिस धन में किसी का दुख जुड़ा हो, वह अपने पास नहीं रखना चाहिए,…

Happy, How to be happy, happiness
दुनिया मेरे आगे: परमार्थ एक स्थिर आनंद, यह स्वार्थ लोभ और इच्छाओं से परे

जब हम एक बार दूसरों को देकर खुशी प्राप्त करना सीख लेते हैं, परमार्थ से आनंद प्राप्त करने लगते हैं,…

duniya mere aage
दुनिया मेरे आगे: हर बीतता पल हमें मृत्यु के एक-एक क्षण ले जाता है करीब, मौन होकर भी सबसे प्रखर है समय की भाषा

समय कभी बोलता नहीं, लेकिन उसका मौन सबसे प्रखर भाषा है। यह हर व्यक्ति को उसकी हैसियत, कीमत और नियति…

Duniya Mere Aage
दुनिया मेरे आगे: बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक क्रांति के लिए रहना पड़ता है प्रयत्नशील

हम कितना श्रम करते हैं और कितना अर्जन करते हैं, यह कोई मायने नहीं रखता। दरअसल, हमने समाज को क्या…

Duniya mere aage
दुनिया मेरे आगे: सिर्फ इच्छाओं में घूमा करता है मनुष्य, नफा-नुकसान के गणित ने संवेदनाओं को कर दिया है छोटा

मनुष्यता को बचाने की लड़ाई हर सभ्यता में दर्ज है, लेकिन बचाना और अंत तक बचाए रखने वाली चीज है…

Duniya Mere Aage, दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: दुनिया कोई स्थिर ठिकाना नहीं, बल्कि एक तीव्र गति से ब्रह्मांड में विचरण करता हुआ पिंड, हर गति में मृत्यु की अनिवार्यता का कराती है दर्शन

एक दिन वह परम स्पष्टता आएगी, जब जीवन की सारी भागदौड़, सारे संघर्ष, सारी उपलब्धियां- सब कुछ एक छोटे-से बालक…

Dunia Mere Aage, Jansatta Online
दुनिया मेरे आगे: संवेदनशील व्यक्ति को ही समझ आ सकती है थकान की सौंदर्य, जिसे महसूस करने की होती है जरूरत

आज का समय हमें ‘परिणाम’ से बांधता है, लेकिन थकान ‘प्रयास’ की भाषा है। वह कहती है कि हमने दौड़…

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दुनिया मेरे आगे: प्रकृति के रहस्यों को समझने के मामले में मनुष्य की पहुंच रही है सीमित, एक मुकाम पर पहुंच कर समाप्त हो जाती है यात्रा

इंसान सब कुछ नहीं जानता, इसलिए उसमें हर समय कुछ नया जानने की जिज्ञासा बनी रहती है। यही उसे नए…

Duniya Mere Aage
दुनिया मेरे आगे: जरूरत बनाम दिखावा, किसी के पास 20 जोड़ी कपड़े तो वहीं किसी के पास किसी तरह चलता है काम

कम सामान के साथ जीना, उसे संभालकर काम में लेना, उसकी कद्र करना उसके वैकल्पिक उपयोग खोजना हमें अधिक सार-संभाल…

Duniya mere aage
दुनिया मेरे आगे: जीवन में सुख और दुख का आपस में है गहरा संबंध, हमें शाश्वत आनंद का मार्ग दिखाती है आत्मिक सत्य की प्राप्ति

सुख-दुख दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। तेज चिलचिलाती धूप के बाद किसी ठंडे स्थान पर आने के बाद ही…

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