कामिक्स केवल बच्चों या किशारों की पसंद नहीं था, बड़े लोग भी समय काटने के लिए इन्हें बड़े चाव से…
नैतिक मूल्यों के अनुकरण से ही उत्तम व्यक्तित्व का स्वामी बना जा सकता है।
किसी ने सच ही कहा है कि प्रेम वसंत-समीर है और प्रेम करने का कोई निश्चित दिन नहीं होता।
कोई बड़ा होकर कैसा इंसान और नागरिक बनेगा, इसकी नींव बचपन में ही रखी जाती है। कहते हैं कि बच्चे…
प्रेम का रंग जब आत्मा को भिगोता है, तो अंतस में जलतरंग-सा बज उठता है।
जिंदगी में सब कुछ उजला नहीं होता। कुछ कालिमा भी होती है। कुछ धुंधलका भी होता है।
समय जैसा निर्मोही शायद ही दुनिया में कोई होगा। इसका बर्ताव सबके लिए एक जैसा होता है।
समय गुजरता जाता है, वह घुटता जाता है। फिर एक समय ऐसा आता है, जब वह इस सबको बिना स्वीकार…
बात कुछ विचित्र लगेगी, मगर सौ फीसद सच है। एक रात मेरा नवजात उपन्यास मेरे सपने में आया।