सही बात यह है कि भाषा भावों और विचारों को छुपाने का माध्यम है।
अब तक होली को हम जैसा भी देखते रहे हों, लेकिन अब होली उदास है।
कविता की व्याख्या, समीक्षा और विश्लेषण करते वक्त विशेष सावधानी और तैयारी की जरूरत होती है।
मेरे यह अति भावुक मित्र हों या आप और हम, भावुकता के वशीभूत ऐसी गलतियां प्राय: करते रहते हैं। कोई…
दलित दूल्हों को घोड़ी से उतारने वालों में उसी धर्म के लोग होते हैं, जिसके दूल्हे होते हैं।
प्राय: पुरुषों को कहते सुना है कि स्त्रियों के पेट में कोई बात नहीं पचती।
हमारे यहां स्त्री सशक्तिकरण के जितने आंदोलन चले, वे मानसिकता को बदलने और व्यवहार में आई जड़ता को तोड़ने के…
यह सिर्फ बसंत का ही कमाल है। सब कुछ उमंग और उत्साह से भरा। मनमोहक और मानवीय भावों से उपजा।…