कुछ समाजशास्त्रियों का कथन है कि मृत्यु जीवन से अवकाश ग्रहण करने की स्थिति है, जैसे लोग अपने काम से…
मनोवैज्ञानिक यह सिद्ध कर ही चुके हैं कि अतीत का हर कठिन दिन आज मीठा ही महसूस होता है। इसलिए…
हम सभी ने अपने शरीर और दिमाग में सोशल मीडिया का दखल इतना बढ़ा दिया है कि सामाजिक ढांचा हिलता-डुलता,…
विपरीत समय में पूर्ण गरिमा के साथ अपनी मुस्कुराहट को कायम रखना ही मनुष्य की जिजीविषा बन सकती है, जिसे…
अगर मानव जीवन के विभिन्न भाव असंतुलन में होते हैं तो क्रोध के उत्पन्न होने की संभावना अत्यधिक होती है।
आज हम अपनी जरूरतें अपने ही भीतर दफन करते जाते हैं तो कहीं गैरजरूरी बातों और चीजों को जीवन की…
कई लोग पैसों को फिजूलखर्ची से बचाकर उनकी हिफाजत करना और उन्हें सुरक्षित जगह इकट्ठा करके रखना ही बुद्धिमानी भरा…
आज की तथाकथित आधुनिक जीवनशैली या यों कहे अस्त-व्यस्त जीवनशैली में हम वैसे तो बहुत कुछ बिसरा चले हैं, लेकिन…
दिक्कतें और कठिनाइयां आनी-जानी हैं। इन्हें रोजमर्रा के कामों की तरह गाते-गुनगुनाते बगैर फिक्रमंदी सरलता से निपटाते जाना चाहिए।
हममें से बहुतेरे लोग स्थायित्व के लिए सब कुछ दांव पर लगा देना चाहते हैं, लेकिन यह कभी तय नहीं…
सेल्फी का चलन और आकर्षण हमारी खोई हुई ऊर्जा और आभासी अजनबियों की वाहवाही के लिए जीने की बढ़ती महामारी…
जीवन की परीक्षा में अधिकांश लोग इसलिए विफल रहते हैं, क्योंकि वे बिना सोचे-समझे दूसरों की नकल करते हैं।