दुनिया मेरे आगे: अहं और वहम के चेहरे, एक से अहंकार पनपता है तो दूसरे से अविश्वास की भावना

कई बार अहं और अहंकार के बीच एक कड़ी होती है, जो दोनों को जोड़े रखती है। जब हम कहते…

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दुनिया मेरे आगे: प्रेम से चलती सृष्टि, फूल यह नहीं कहता है कि आज नहीं, कल खिलूंगा…

प्रेम को कई बार कमजोर की निशानी मान लिया जाता है। जबकि प्रेम सिर्फ साहस की निशानी है। किसी को…

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दुनिया मेरे आगे: विश्वास का मूल आधार है प्रेम, मन के भावों को आदर्श से बांधने पर कमजोर होता है अपनापन

प्रेम में क्रोध, रूठने-मनाने के ये भाव भी उतने ही नैसर्गिक हैं, जितने कि समर्पण के भाव। प्रेम जितना गहरा…

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दुनिया मेरे आगे: जीवन में दूसरों के लिए जगह, निजी परिवार के दायरे से बाहर निकलने का सुख

आज का मनुष्य ‘सैद्धांतिक आसमान’ यानी ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ से गिरकर ‘खजूर पर’ यानी ‘मानव केंद्रित’ भी नहीं रह सका, बल्कि…

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दुनिया मेरे आगे: आधुनिकता के नाम पर शहरों से गुम होती प्रकृति

आधुनिक पीढ़ी प्रतिस्पर्धात्मक जीवन जी रही है। ऐसे लोग पिछले दिन की असफलता के साथ सुबह देर तक अवसाद में…

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दुनिया मेरे आगे: बाहर की दुनिया में खुद का विकास खोजता समाज, जड़ों से कटने की पीड़ा और मजबूरी

उम्मीद हमेशा एक छोटी किरण जितनी ही सही, सर्द बर्फ को पिघलाने में समर्थ होती है। इसलिए यह नहीं है…

Happy and sad| Life| society
दुनिया मेरे आगे: स्वीकार का साहस, धोखाधड़ी की भीड़ में विश्वसनीयता की जरूरत

कभी भी किसी ईमानदार आदमी को अपने स्वभाव और काम का प्रचार नहीं करना पड़ता। उसकी प्रशंसा अपने आप फैलती…

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दुनिया मेरे आगे: रिश्तों और मासूमियत के भी नीलामघर, बदल रहे जमाने में नायक और खलनायक की पहचान मुश्किल

जमाना बदल रहा है। हमारे समाज के आधुनिक और व्यवसायी होते जाने के साथ-साथ यह शोषण का ठेका व्यवसाय भी…

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दुनिया मेरे आगे: मनुष्‍य को लक्ष्‍य से विमुख करने में अंतर्द्वंद्व की भूकिका अहम

दुनिया में जिसने भी अपने मन को साध लिया, उसके लिए हर लक्ष्य आसान हो जाता है। मन की एकाग्रता…

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