104 सैटेलाइट्स वाले PSLV-C37 का लॉन्च ISRO और भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

ISRO ने आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से 7 देशों के 104 सैटलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजकर इतिहास रच दिया है। अब भारत के नाम एक बार में सबसे ज्यादा सैटलाइट को लॉन्च करने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। आइए हम आपको बताते हैं कि ISRO का ये लॉन्च आखिर क्यों महत्वपूर्ण है। ये लॉन्च क्यों महत्वपूर्ण है? ये रॉकेट एक सिंगल मिशन में लॉन्च की गई सैटेलाइट्स से लगभग तीन

गुना सैटेलाइट्स ले कर गया है- जून 2014 में रूस का नेपर रॉकेट अपने साथ 37 पेलोड लेकर गया था। वहीं बीते साल 20 जून को ISRO के PSLV-C34 ने 20 सैटेलाइट्स लॉन्च की थी। एक साथ कई सैटेलाइट्स को लॉन्च करते हुए क्या चुनौतियां आती हैं? एक रॉकेट पर लोड की गई सैटेलाइट्स की गिनती केवल उस रॉकेट की जगह और वजन के मामले में वाहन की वहन क्षमता पर निर्भर करता है। लेकिन सैटेलाइट्स को कुछ विन्यास में एक साथ कुछ इस तरह खड़ा करने की जरुरत है ताकि उन्हें बिना एक दूसरे के साथ टकराए हुए वांछित कक्षाओं में अलग-अलग छोड़ा जा सके। सैटेलाइट्स को कैस छोड़ा गया? कार्टेसैट-2 सीरीज सैटेलाइट को पहले छोड़ा गया, उसके बाद दो भारतीय नैनो सैटेलाइट्स INS-1A और INS-1B को छोड़ा गया। 88 डव सैटेलाइट्स सहित बाकी दूसरी सैटेलाइट्स को 10 मिनट की अवधि में जोड़ों में छोड़ा गया था।

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