मंगलवार को दिए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने देश में पटाखों पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने कुछ शर्ते लगायी हैं, जिसमें पटाखे फोड़ने का समय सिर्फ रात 8 बजे से 10 बजे तक का दिया गया है। साथ ही कोर्ट ने आम पटाखों की जगह ‘ग्रीन पटाखे’ फोड़ने का निर्देश दिया है। इसके साथ-साथ कोर्ट ने ऑनलाइन पटाखे बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया और सिर्फ लाइसेंस होल्डर दुकानदार ही पटाखों की बिक्री कर सकेंगे। कोर्ट ने इन निर्देशों के पालन की जिम्मेदारी इलाकों के एसएचओ को दी है। बता दें कि दिल्ली में प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में पटाखों पर बैन लगाने संबंधी याचिका दाखिल की गई थी। इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये निर्देश दिए हैं।

क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?- जिन पटाखों में हानिकारक केमिकल नहीं होते और जिन्हें फोड़ने से वायु प्रदूषण भी नहीं होता, ऐसे पटाखों को ग्रीन पटाखे कहा जाता है। इन पटाखों में हानिकारक चीजों को अन्य कम हानिकारक तत्वों से बदल दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है। बता दें कि केन्द्रीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर हर्ष वर्धन ने जनवरी में इस तरह के पटाखों का प्रस्ताव दिया था। जिसके बाद CSIR लैब्स की विभिन्न शाखाओं में इस पर रिसर्च हुई। इस खोज में सीएसआईआर के साथ ही सेंट्रल इनेक्ट्रो केमिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंडीयन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, नेशनल बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट और नेशनल केमिकल लेबोरेट्री भी शामिल रहे।

इन विभिन्न लैब्स ने इको फ्रैंडली मैटिरियल का इस्तेमाल करते हुए फ्लॉवर पोट्स का विकास किया है, जिससे पर्टिकुलेट मैटिरियल को 405 तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही रिसर्च के बाद कई पटाखों की उत्सर्जन क्षमता और उससे होने वाली आवाज को नियंत्रित कर लिया गया है। ये पटाखे हानिकारक सल्फर डाइऑक्साइड के बजाए पर्यावरण हितैषी तत्व बेरियम नाइट्रेट का उत्सर्जन करते हैं। इन ग्रीन पटाखों को वैज्ञानिकों ने Safe water Releaser (SWAS), Safe Thermite Cracker (Star)और Safe Minimal Aluminium (SAFAL) नाम दिया है। फिलहाल पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन इन ग्रीन पटाखों की टेस्टिंग कर रही है। पटाखे बनाने के लिए मशहूर तमिलनाडु के शिवकाशी में इन ग्रीन पटाखों का परीक्षण भी किया जा रहा है।