इ दिनों लोग अधिकांश रूप से खरीददारी डिजिटल पेमेंट्स के जरिए कर रहे हैं। सुविधाओं से लेकर वस्तुओं की खरीद-बिक्री का काम ज्यादातर रूप से डिजिटल आधारित हो गया है। लेकिन, पिछले कुछ महीनों में पमेंट संबंधी कई घपले और जालसाजियां भी बड़े स्तर पर प्रकाश में आई हैं। ऐसी स्थिति में बचाव के लिए आपको जालसाजों की गतिविधियों और तौर-तरीकों को समझना बेहद जरूरी है। ताकि,आप सुरक्षित रूप से डिजिटल पेमेंट का भुगतान करें। क्योंकि, कई मर्तबा लोगों को लगता है कि वे सही जगह पर पमेंट कर रहे हैं, लेकिन उन्हें तब तक चूना लग चुका रहता है।

1. इस खेल में दूर बैठे मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए फ्रॉड को काफी हद तक लोगों को सावधान रहने के लिए मजबूर कर दिया है। ET की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि जालसाजों ने एक गैर-सरकारी संगठन के नाम से फर्जी नबंरों को ऑनलाइन सूचीबद्ध कराया और दूर से हैंडल करने वाले डेस्कटॉप सॉफ्टरवेयर ‘Anydesk’ को तैयार किया। जालसाजों ने इसके लिए मुंबई की एक महिला का फांसा। वह महिला अपने पालतू जानवर के अंतिम संस्कार के लिए एनजीओ को पैसे ट्रांसफर करना चाहती थीं। महिला को ट्रांसफर के लिए Anydesk सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने को कहा गया। डाउनलोड होते ही दूर बैठे जालसाजों को महिला के एकाउंट की पूरी जानकारी मिल गई और उन्होंने उसके खाते से 30,000 रुपये उड़ा डाले।

ऐसे में लोगों को यही सलाह दी जाती है कि आप किसी भी अंजान शख्स को अपने ट्रांजैक्शन की डिटेल बिल्कुल न दें। खास तौर पर ट्रांजैक्शन के लिए किसी आधिकारिक साइटों को छोड़ दूसरा टूल या ऐप डाउनलोड न करें। यदि बैंक के कर्मचारी होने का दावा करने पर भी कोई डिटेल मांगे तो मत दें।

2. जालसाजों के निशाने पर वे लोग आसानी से रहते हैं जो बीमा कराने की हसरत रखते हैं। ऐसे में भोलभाले लोगों को देख जालसाज उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। इसके लिए IRDAI का हवाला देते हुए एक इंश्योरेंस पॉलिसी देने का वादा किया जाता है। लेकिन, ख्याल रहे कि IRDAI किसी भी तरह की पॉलिसी नहीं बेचती है। ऐसे डोमेन वाले पोर्टल से आप खास तौर पर दूरी बनाए रखें।

3. KYC के नाम पर भी धांधली जमकर हो रही है। इसके जरिए जालसाल आपके बैंक से पैसे की निकासी आसानी से कर सकते हैं। ET ने इस संदर्भ में एक IAS अधिकारी के बारे में बताया है। उदयपुर में एक IAS अधिकारी से गलत ढंग से केवाईसी डिटेल के नाम पर जानकारी ली गई और उनके खाते से 6 लाख रुपये साफ कर दिए गए। उनसे जालसाजों ने केवाईसी अपडेट के नाम पर उनसे ओटीपी नंबर और अकाउंट डिटेल ले लिया और पैसे निकाल लिए। ऐसे फ्रॉड से बचने के लिए आपको कभी भी एसएमएस द्वारा भेजे गए किसी यूआरएल लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।

4. फर्जी तरीके से यूपीआई पेमेंट लिक दिखाकर भी आपकी जेब काटी जा सकती है। पुणे में भी एक ऐसा मामला सामने आया जहां पर जालसाजों ने एक व्यापारी से फर्जी यूपीआई के जरिए उसके डिजी वॉलेट से 10 रुपये जमा करने को कहा। इस दौरान व्यापारी को एक लिंक आया, जहां उसने अपना UPI ID और OTP लिंक डालकर भेज दिया। इसके बाद जालसालों को पूरी डिटेल मिल गई और उन्होंने उसके खाते से 1.53 लाख रुपये उड़ा लिए।