उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में जेल प्रशासन के द्वारा गधों को हिरासत में लिया गया था। मिली जानकारी के अनुसार उरई में हिरासत में लिए गए इन गधों ने जिला जेल के बाहर लगे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया था जिसके बाद जेल प्रशासन के कर्मचारी इन्हें पकड़कर ले आए। समाचार एजेंसी एएनआई ने इस मामले का एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में जेल अधिकारियों के साथ ही गधे के मालिक और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी थे। एएनआई से ये खबर आते ही तमाम समाचार चैनलों और न्यूज़ पोर्टलों ने ये लिखना शुरू कर दिया कि यूपी पुलिस अब गधों को गिरफ्तार करने में बिजी हो गई है। एनडीटीवी ने भी गधों की गिरफ्तारी की इस खबर को चलाया। एनडीटीवी ने अपने न्यूज़ पोर्टल पर भी इस खबर को पब्लिश किया। चैनल की एंकर सुपर्णा सिंह ने खबर के लिंक को ट्वीट किया। खबर देख यूपी पुलिस के ट्विटर हैंडल से लिखा गया कि इस खबर का यूपी पुलिस से कोई लेना देना नहीं है।
#WATCH Police release a herd of donkeys from district jail in UP's Jalaun. They had been detained for destroying plants outside jail pic.twitter.com/RkV8Hng0k2
— ANI (@ANI) November 27, 2017
Dear @ndtv #uppolice has nothing to do with their arrest or custody.
We request you to check your facts with us next time. https://t.co/6i9wN0nGZN— UP POLICE (@Uppolice) November 28, 2017
इस पर सुपर्णा ने जवाब देते हुए लिखा कि हमारी खबर में कहीं यूपी पुलिस का जिक्र नहीं है, आप दोबोरा से पढ़ें।
Dear @Uppolice , our story does not mention you. Request you to come please read the story next time.
— Suparna Singh (@Suparna_Singh) November 28, 2017
सुपर्णा के इस ट्वीट पर फिर से यूपी पुलिस ने रिट्वीट करते हुए लिखा- हमने दोबोरा पढ़ा, आप भी दोबारा पढ़ लें..। आपने लिखा है कि यूपी में पुलिस गधों को पकड़ रही है..।
Dear @Suparna_Singh @ndtv
We saw yr story twice .Request u to do t same.If we only quote yr anchor, @UPPolice has been mentioned twice, “In Uttar Pradesh, t police arrested donkeys” & “why is the Uttar Pradesh Police wasting time with donkeys as the real criminals run loose” 1/2 https://t.co/XwWWFZgm6h— UP POLICE (@Uppolice) November 28, 2017
सुपर्णा सिंह को समझ आ गया कि तमाम सावधानियों को बाद भी गलती से स्टेट पुलिस का नाम आ गया है तो उन्होंने सफाई देते हुए लिखा – वीडियो में यूपी पुलिस का जिक्र था, उस वीडियो को हटा लिया गया है। जाइए ऐसा करने वालों को गिरफ्तार करें। आपका दिन शुभ हो।
Dear @uppolice, i said "READ our story" – and i repeat, it does not mention you. The video that DOES refer to you will be removed. Have a nice day, now get those baddies! thanks
— Suparna Singh (@Suparna_Singh) November 28, 2017
यूपी पुलिस ने सुपर्णा के इस ट्वीट को भी नजरअंदाज नहीं किया और जवाब दिया कि अगर आप कुछ और कंटेंट चलाओ तो हमें कोई दिक्कत नहीं। आपका दिन भी शुभ हो।
Dear @Suparna_Singh @ndtv ~If you are happy running different content on your print & video, good luck !!
Have a nice day too. https://t.co/2WTgePI7pz— UP POLICE (@Uppolice) November 28, 2017
आपको बता दें कि राज्यों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी स्टेट पुलिस के पास होती है जबकि राज्यों के कारागारों की जिम्मेदारी जेल पुलिस की होती है। गृह विभाग के सर्कुलर के मुताबिक राज्य पुलिस और जेल पुलिस का मैनुअल भी अलग-अलग होता है। दोनों का सर्विस कोड और प्रशासनिक ढांचा भी अलग-अलग होता है।

