कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक एड हॉक प्रोफेसर ने कुछ ऐसा कहा कि पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। दरअसल यह महिला प्रोफेसर लंबे समय से एड हॉक कॉन्ट्रैक्ट के तहत ही नौकरी पर रखे जाने से नाराज थीं और उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के सामने अपनी व्यथा सुनायी। इस दौरान प्रोफेसर भावुक भी हो गईं। महिला प्रोफेसर ने कहा कि मैं पिछले 11 सालों से साल 2006 से दिल्ली विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की एड हॉक प्रोफेसर के रुप में पढ़ा रही हूं। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि मैं आपके इस सवाल का जवाब पहले से ही दे दूं? राहुल गांधी ने कहा कि ये एड हॉक निकाल देना चाहिए। राहुल गांधी के इतना कहते ही हॉल में तालियां बजने लगीं।
हालांकि महिला प्रोफेसर यहीं नहीं रुकी और कहा कि ये एड हॉक हम पर बदनुमा दाग है, जिसे हम मिटाना चाहते हैं और इसीलिए हम यहां आए हैं। महिला प्रोफेसर ने कहा कि हमारा अपॉइंटमेंट 4-4 महीने के लिए जैसे रिचार्ज कूपन की तरह किया जाता है। हमसे काम तो पूरा लिया जाता है, इवैल्यूएशन कराना है, पढ़ाना है, एडमिशन कराना है और कॉलेज में किसी तरह का फंक्शन कराना है तो एड हॉक टीचर को ढूंढा जाता है। यहां तक कि भीड़ जुटानी है तो भी एड हॉक टीचर्स को ढूंढा जाता है। महिला प्रोफेसर के इतना कहते ही लोगों से भरा हुआ पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
#WATCH: An Ad-hoc professor of Delhi University explains the problems of ad-hoc professors to Congress President Rahul Gandhi, at an interaction event in Delhi pic.twitter.com/6QDzAmKV4j
— ANI (@ANI) September 22, 2018
बता दें कि एड हॉक टीचर्स वो होते है, जिन्हें कॉन्ट्रैक्ट बेस पर नियुक्त किया जाता है और वक्त वक्त पर उनका कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जाता है, लेकिन उनकी परमानेंट तौर पर नियुक्ति शायद ही हो पाती है। इन एड हॉक टीचर्स को मैटरनिटी लीव, मेडिकल लीव जैसी छुट्टियां भी नहीं दी जातीं। इतना ही नहीं एड हॉक टीचर्स की सेवाएं बिना किसी नोटिस के खत्म कर दी जाती हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली यूनिवर्सिटी के 10,000 टीचर्स में से करीब 4000 टीचर्स एड हॉक पर तैनात हैं।
