उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर एनडीटीवी के सह संस्‍थापक प्रणव रॉय के आंकलन पर सोशल मीडिया यूजर्स ने मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं। रॉय ने यूपी चुनावों के छठे चरण के मतदान के बाद वरिष्‍ठ पत्रकार शेखर गुप्‍ता, राहुल श्रीवास्‍तव, दोराब सुपारीवाला और कमाल खान से चर्चा से निष्‍कर्ष निकाला है कि सूबे में भाजपा के जीतने के सबसे ज्‍यादा चांस है। उन्‍होंने राज्‍य के जातिगत समीकरणों, चुनावी मुद्दों, पुराने नतीजों के आधार पर अनुमान लगाया है कि भाजपा के यूपी चुनाव जीतने की 55-65 प्रतिशत संभावना है। सपा-कांग्रेस 30-40 प्रतिशत के साथ दूसरे स्‍थान पर हैं। वहीं बसपा के जीतने की संभावना केवल 5-10 प्रतिशत के बीच है।

उनके अनुसार, यूपी चुनावों में जो पार्टी/गठबंधन 35 प्रतिशत वोट ले जाएगा वह आसानी से सरकार बना लेगा। इसके अनुसार जिस पार्टी/गठबंधन को 35 प्रतिशत वोट मिल जाएंगे वह 200 से ज्‍यादा सीटें जीत लेंगी। इस पर टि्वटर पर ज्‍यादातर यूजर उनसे सहमत नजर आए। हालांकि कुछ लोगों ने सवाल किए कि क्‍या इस तरह के आंकलन चुनाव आयोग की आचार संहिता का उल्‍लंघन नहीं है। कुछेक टि्वटर यूजर्स प्रणव रॉय के आंकलन से असहमत दिखे और उन्‍होंने लिखा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन को भारी जीत मिलेगी। हालांकि बसपा के समर्थन में कोई नहीं दिखा। वैसे बता दें कि बसपा सोशल मीडिया पर ज्‍यादा सक्रिय भी नहीं है।

एक यूजर ने प्रणव रॉय के आंकलन का समर्थन करते हुए लिखा, ”एक कदम स्वच्छता कि और ..काँग्रेस मुक्त भारत।” एक अन्‍य ने तो अपना आंकलन देते हुए लिखा, ”जाटव+मुस्लिम- 26 प्रतिशत, यादव+मुस्लिम- 22 प्रतिशत लेकिन भाजपा जनरल+गैर यादव+गैर जाटव- 50 से 55 प्रतिशत।” वहीं इसके विरोध में एक यूजर ने लिखा कि कांग्रेस-समाजवादी पार्टी गठबंधन उत्तर प्रदेश चुनाव जीतेगा। एक अन्‍य के अनुसार, ”सर, यह गलत रिपोर्ट है। मैं जमीनी रिपोर्ट जानता हूं। यह बिलकुल अलग है। सपा+कांग्रेस- 59 से 63 प्रतिशत, बसपा- 22 से 27 प्रतिशत, भाजपा 19 से 23 प्रतिशत।”

https://twitter.com/vsandeep09/status/838094487708659713

एक अन्‍य ने लिखा, ”सपा कांग्रेस 200000000 प्रतिशत तय है।” वहीं एक यूजर ने आचार संहिता की ओर इशारा करते हुए लिखा कि चुनाव आयोग कहां है। दूसरे ने लिखा, ”आप पोल प्रतिशत कैसे पेश कर सकते हैं। क्‍या यह चुनाव आयोग के नियमों का उल्‍लंघन नहीं है? उत्‍तर प्रदेश में आठ मार्च को सातवें चरण के लिए 40 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। आखिरी चरण के लिए सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में डेरा जमाए हुए हैं और वहां रोड शो कर रहे हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए सीएम अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने रोड शो किया। बसपा सुप्रीमो मायावती रैलियों में जुटी हुई हैं।

कांग्रेस के साथ मिलकर सपा दोबारा से सत्‍ता में वापसी करना चाहती है। वहीं भाजपा 15 तो बसपा 5 साल का सूखा समाप्‍त करना चाहती है। सपा ‘काम बोलता है’ नारे के साथ मैदान में हैं। वहीं भाजपा और नरेंद्र मोदी के लिए यूपी विधानसभा के चुनाव नोटबंदी के फैसले के बाद यह पहली बड़ी चुनौती है। साथ ही उसके सामने 2014 के लोकसभा में 80 में से 71 सीटें जीतने के प्रदर्शन को दोहराने का दबाव होगा।