कोरोना वायरस भारत में ज्यादा विनाशकारी रूप ना ले सके इसके लिए पीएम मोदी के निर्देश पर 25 मार्च से ही 21 दिनों के लिए पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया है। 24 मार्च को रात 8 बजे पीएम ने देश को संबोधित करते हुए बताया कि 4 घंटे बाद यानि रात 12 बजे से देशव्यापी लॉकडाउन लागू हो जाएगा। लॉकडाउन का ऐलान होते ही काफी अफरा-तफरी दिखाई दी। कुछ लोग राशन की दुकानों की तरफ भागे तो कुछ लोग शहरों से अपने गांव-कस्बों की तरफ।

पिछले दो दिनों से ऐसी तमाम तस्वीरें औऱ वीडियोज सामने आईं जिनमें लोग पैदल ही लंबी दूरी पर निकल पड़े। इनमें ज्यादातर निम्न आय वर्ग के लोग थे जो दिहाड़ी पर काम करते हैं या फिर छोटी-मोटी नौकरी। इन लोगों का कहना है कि जहां वह किराए पर रहते हैं वहां लॉकडाउन के बाद रहना मुश्किल हो गया था इसलिए वह अपने घरों की तरफ चल पड़े हैं। बस, ट्रेन जैसी यातायात के साधनों पर रोक लगने के कारण ये लोग पैदल ही अपने घरों की तरफ बढ़ चले।

अब सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें दावा किया गया है कि कुछ लोग जो ग्वालियर से यूपी में अपने घर पैदल ही आ रहे थे उन लोगों को पुलिस ने रोक लिया औऱ बतौर सजा घुटनों के बल चलाया। वीडियो बदायूं जिले का बताया जा रहा है।

ऐसे ही कुछ और भी वीडियो सोशल मीडिया में शेयर किए जा रहे हैं जहां पुलिस लोगों पर सख्ती करती नजर आ रही है। इन वीडियोज को शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं कि पुलिस को इन मजबूरों की मदद करनी चाहिए ना कि इस तरह का व्यवहार।


बता दें कि लॉकडाउन के ऐलान के बाद से ही पुलिस पर इसे लागू कराने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। बार-बार अपील औऱ मना करने के बाद भी लोग सड़कों पर निकल रहे हैं। कुछ लोग जरूरी सामान लेने निकल रहे हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो बिना काम के बाहर घूमते दिख रहे हैं। पुलिस के ऊपर चुनौती है कि वह किस तरह से लॉकडाउन का पालन सही तरीके से कराती है। पुलिस के साथ ही लोगों को भी समझना होगा कि घरों से बाहर निकलना उन्हें कोरोना की चपेट में ला सकता है।