सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू एक बार भी सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी के लिए विवाद से घिर गए हैं। जस्टिस काटजू ने फेसबुक पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों कन्हैया कुमार, उमर खालिद और शहला राशिद को सतही, डेमागाग (भड़काऊ नेता) और बोलबाज करार दिया है। काटजू ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि, “कन्हैया कुमार, उमर खालिद, शहला राशिद आदि-इत्यीदि को सतही, डेमागाग और बोलबाज हैं जिन्हें चीजों की वैज्ञानिक समझ नहीं है। वो जब बोलते हैं तो मुझे शेक्सपीयर के मैकबेथ की याद आती है। ये बेवकूफों द्वारा कही गयी कहानी है जिसमें ढेर सारा शोर-शराबा है लेकिन काम का कुछ नहीं।”
जस्टिस काटजू के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। जहां कुछ उनकी आलोचना कर रहे थे तो कुछ उन्हें परोक्ष रूप से भाजपा और आरएसएस का समर्थक बता रहे थे। रिजवान अहमद जफर अहमद ने जस्टिस काटजू के पोस्ट पर कमेंट किया है, “सर, इनके हाथ में तो फिलहाल जेएनयूएसयू (जेएनयू छात्रसंघ) भी नहीं है फिर भी आप उनके पीछे पड़े हैं…शायद इसलिए तो नहीं कि वो चड्ढी गैंग के खिलाफ हैं।”
साक्षी स्नेहा नामक यूजर ने लिखा है, “अगर शहला, राशिद, उमर खालिद, कन्हैया इंटेलिजेंट नहीं हैं तो कौन है सर? आरएसएस, एबीवीपी?” काटजू ने जवाब दिया,, “मुझे नहीं पता कि कौन इंटेलिजेंट है लेकिन मुझे ये पता है कि साक्षी प्रीटि है।” एक यूजर सज्जाद खान ने कमेंट किया, “भारत को अपनी जनता के लिए टॉयलेट बनाने पर ही ध्यान देना चाहिए।” जवाब में मार्कण्डेय काटजू ने कहा, “बिल्कुल पेट भर खाना खाने के बाद टॉयलेट का ही नंबर आता है।”
एक यूजर ऋतेश गुप्ता ने कमेंट में जस्टिस काटजू से पूछा कि क्या आप इस विषय पर मेरे सेंटर में व्याख्यान देना चाहेंगे? जब जस्टिस काटजू ने पूछा कि कौन सा सेंटर तो एक दूसरे यूजर मोहित चौहान ने कहा “सेंटर फॉर मेंटर पेंशेंट्स” लेकिन ऋतेश गुप्ता ने जस्टिस काटजू से कहा, “सेंटर फॉर् एजुकेशनल स्टडीज…सर प्लीज आइए और शिक्षा से जुड़े किसी विषय पर व्याख्यान दीजिए।”

