Google Trends: केंद्र सरकार का पूरा जोर सरकारी योजनाओं और सुविधाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाने पर है। ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा से आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट ‘पंचायती राज संस्थानों के बुनियादी आंकड़े-2025’ ने पंचायतों में डिजिटल ढांचे की कमी को उजागर कर दिया है, जिससे सवाल ये भी उठे हैं कि आखिर डिजिटल इंडिया का मिशन भी क्या पीछे छूट गया है?
56 हजार से अधिक पंचायतों में कंप्यूटर नहीं
मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल 2,63,989 ग्राम पंचायतों में से केवल 2,07,602 पंचायतों के पास ही कंप्यूटर की सुविधा है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश की करीब 21 प्रतिशत यानी 56,387 ग्राम पंचायतें आज भी बिना कंप्यूटर के काम कर रही हैं। हालांकि, मंत्रालय ने सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वर्ष 2025 में 19,472 कंप्यूटर वितरित किए हैं, लेकिन लक्ष्य अभी भी दूर है।
पंजाब और हरियाणा की स्थिति चिंताजनक
हैरान करने वाली बात यह है कि कृषि और आर्थिक रूप से समृद्ध माने जाने वाले राज्यों में पंचायतों की स्थिति काफी बदतर है। पंजाब की स्थिति सबसे खराब है। कुल 13,236 ग्राम पंचायतों में से मात्र 300 (सवा दो प्रतिशत) के पास ही कंप्यूटर उपलब्ध है।
हरियाणा में 6,227 ग्राम पंचायतों में से केवल 631 (करीब 10 प्रतिशत) पंचायतों के पास ही डिजिटल सिस्टम मौजूद है। वहीं बात बिहार करें तो यहं 8,053 ग्राम पंचायतों में से मात्र 2000 (25 प्रतिशत) के पास ही कंप्यूटर की सुविधा है।
बड़े राज्यों ने मारी बाजी
कुछ राज्य पिछड़ रहे हैं, वहीं 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने डिजिटल साक्षरता की दिशा में मिसाल कायम की है। इन राज्यों में 100 प्रतिशत पंचायतों के पास कंप्यूटर सुविधा है।
