राजीव गांधी से भारत रत्न वापसी लेने के विवाद में आम आदमी पार्टी (आप) ने साफ किया है कि विधायक अलका लांबा से इस्तीफा नहीं मांगा गया है। इस बारे में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट किया है कि पार्टी ने अलका लांबा से कोई इस्तीफा नहीं मांगा है। अलका लांबा ने भी साफ किया है कि वह इस्तीफा नहीं दे रही हैं। बता दें कि आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में आप विधायक जरनैल सिंह द्वारा पेश विवादित प्रस्ताव का समर्थन करने से दो टूक इनकार करते हुए विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने तक की बात कह दी थी। दिल्ली विधानसभा में प्रस्ताव लाया गया था कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी जी को दिया गया भारत रत्न वापस लिया जाना चाहिये, अलका लांबा से भी भाषण में इसका समर्थन करने को कहा गया, जो उन्हें मंजूर नही था, इसलिए वो सदन से वॉक आउट कर गई थीं। इस बीच आप ने इस तरह के किसी भी प्रस्ताव के पास होने से इनकार किया है। मगर विधान सभा सूत्रों ने बताया है कि इस तरह का एक प्रस्ताव पास हुआ था।

शनिवार को उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि आम आदमी पार्टी का ऐसा कोई विचार नहीं है कि उनसे भारत रत्न वापस लिया जाए। आप नेता सौरव भारद्वाज ने कहा, ‘विधानसभा में जो प्रस्ताव रखा गया, उसमें राजीव गांधी का कोई जिक्र नहीं था। आप विधायक जरनैल सिंह ने कहा, ‘यह (राजीव गांधी से भारत रत्न वापस ले लिया जाए) मूल प्रस्ताव का हिस्सा नहीं था, यह मेरी भावना थी और मैंने यह कहा। तकनीकी रूप से यह नोटिस में नहीं था।’

हालांकि जब इस पर मीडिया में बवाल मचा तो पार्टी की तरफ से सफाई दी गई। आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दिल्ली विधानसभा से पारित प्रस्ताव में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का ‘भारत रत्न’ सम्मान वापस लेने की मांग का जिक्र नहीं होने का उल्लेख करते हुए शनिवार को कहा कि यह मांग संशोधित प्रस्ताव का हिस्सा थी, जिसे सदन से पारित नहीं किया गया।  हालांकि तब तक देर हो चुकी थी। सोशल मीडिया पर अरविंद केजरीवाल और आप की लानत-मलानत शुरू हो गई। लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।