भारत में नवनियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत को Pax Silica की पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। अहम बात यह है कि एक महीने पहले ही अमेरिका ने अपने कई सहयोगी देशों जैसे- जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजरायल, यूएई और ऑस्ट्रेलिया को इस पहल में शामिल किया था लेकिन भारत को इससे बाहर रखा था।
तब यह चिंता पैदा हुई थी कि क्या ट्रेड डील को लेकर बने अनिश्चितता के माहौल की वजह से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो रहे हैं? लेकिन अब गोर के द्वारा भारत को निमंत्रण देने से यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच के रिश्तों में तनाव कम हुआ है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, Pax Silica एक अमेरिकी पहल है, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी सप्लाई की चेन को सुरक्षित करना है। साथ ही इसका मकसद ‘दोस्त और भरोसेमंद’ देशों को साथ लाना भी है।
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विदेश विभाग का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि महत्वपूर्ण तकनीक सुरक्षित रहे और इस पर किसी और देश का नियंत्रण ना हो। अमेरिका की इस पहल को चीन के ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ का मुकाबला करने के रूप में देखा जा रहा है।
सर्जियो गोर ने कहा कि ट्रेड डील को लेकर दोनों पक्ष बातचीत कर रहे हैं। इस संबंध में अगली बैठक 13 जनवरी को होगी। उन्होंने कहा कि यह आसान नहीं है लेकिन हमारा संकल्प इसे पूरा करने का है।
भारत के लिए Pax Silica क्यों अहम है?
मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर चीन की पकड़ को लेकर पश्चिमी देशों के बीच कोरोना की महामारी के बाद संदेह बढ़ा है। इस कारण मल्टीनेशनल कंपनियों को China-plus-one रणनीति को अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अमेरिका चीन के साथ ट्रेड वॉर में उलझा हुआ है और भारत ग्लोबल सप्लाई चेन शिफ्ट में हो रहे इस बदलाव में हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश कर रहा है।
भारत में वर्तमान में वैश्विक स्तर का एआई बुनियादी ढांचा नहीं है और इस पहल के तहत होने वाले निवेश और साझेदारी से उसे काफी फायदा हो सकता है।
अमेरिकी विदेश विभाग का यह भी कहना है कि Pax Silica की यह पहल संवेदनशील तकनीकों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को कुछ देशों की पहुंच या कब्जे से बचाएगी।
Pax Silica में भारत की भागीदारी तकनीक-आधारित क्षेत्रों में भारत की क्षमता को मजबूत कर सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस पहल में शामिल देश एआई और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करते हैं। जैसे, अमेरिका सेमीकंडक्टर चिप के डिजाइन और IP में आगे है जबकि नीदरलैंड लिथोग्राफी मशीनों के लिए जरूरी देश है। लिथोग्राफी मशीनें चिप प्रिंटिंग के लिए इस्तेमाल होती हैं।
अमेरिकी कंपनियों ने किया भारत में भारी निवेश
भारत की Pax Silica में एंट्री होने से ठीक पहले दिसंबर में अमेरिकी कंपनियों ने भारत के एआई के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है। पिछले महीने, माइक्रोसॉफ्ट ने अगले चार सालों में भारत में अपने एआई बुनियादी ढांचे और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षमता का विस्तार करने के लिए 17.5 बिलियन डॉलर खर्च करने की योजना के बारे में ऐलान किया था। एशिया में किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट ने 3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया था।
पिछले महीने ही गूगल ने आंध्र प्रदेश में एक एआई डेटा सेंटर खोलने की घोषणा की थी। गूगल ने कहा था कि वह पांच सालों में 15 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश करेगी। यह भारत में गूगल का अब तक का सबसे बड़ा निवेश होगा। गूगल ने अडाणी समूह और एयरटेल के साथ साझेदारी की है।
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