आप कितने स्वस्थ हैं, इसकी जानकारी के लिए हर महीने रुटीन चेकअप करना बेहद जरूरी होता है। जहां डॉक्टर अमूमन रक्त और पेशाब की जांच करवाने की सलाह देते हैं। वहीं, वैज्ञानिकों ने एक अनोखा सेंसर विकसित करने का दावा किया है जो आपके पसीने से आपकी सेहत का राज बता देगा।
वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सेंसर पता लगा सकता है कि आपके पसीने में क्या है और आपकी सेहत कैसी है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि पसीने की निगरानी से किसी बीमारी का पता लगाने के लिए रक्त निकालने की आवश्यकता को दरकिनार किया जा सकेगा और इससे निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) या थकान जैसी स्वास्थ्य समस्याओं में तुरंत जानकारी मिल सकेगी।
लॉरेंस बर्कले राष्ट्रीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिक और यूसी बर्कले में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर और वरिष्ठ लेखक अली जेवी ने कहा कि ‘इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य केवल सेंसर विकसित करना ही नहीं था, बल्कि कई विषयों पर अध्ययन की शुरुआत करना था। साथ ही यह पता लगना था कि पसीना हमारे शरीर के बारे में क्या जानकारी दे सकता है, मैंने हमेशा पसीने की ‘डिकोडिंग’ संरचना के बारे में बात की है।’ उन्होंने कहा, ‘इसके लिए, हमें ऐसे सेंसर चाहिए जो विश्वसनीय हों, पुनरुत्पादनीय और इसे हम बड़े पैमाने पर बना सकें ताकि हम शरीर के विभिन्न स्थानों में कई सेंसर लगा सकें और उन्हें परख सकें।’
इस नए सेंसर में एक स्पाइरलिंग माइक्रोस्कोपिक ट्यूब या माइक्रोफ्लुइडिक होता है, जो त्वचा से पसीना इकट्ठा करता है। माइक्रोफ्लुइड के माध्यम से किसी व्यक्ति के शरीर से पसीना कितनी तेजी से निकलता है इस पर नजर रखी जा सकती है। कोई व्यक्ति कितना पसीना बहा रहा है या उसके पसीने की क्या दर है इस बारे में सेंसर बताता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक माइक्रोफ्लुइडिक्स पसीने में पोटेशियम और सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की सांद्रता और ग्लूकोज के चयापचय का पता लगा सकता है।
शोधकर्ताओं ने सेंसर को परखने के लिए वह स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी देता है या नहीं इसके लिए व्यायाम कर रहे लोगों के शरीर के विभिन्न जगहों जैसे ललाट, अग्र-भुजाओं, कांख और पीठ के ऊपर लगा दिया। सेंसर से लोगों की पसीने की दर, पसीने में सोडियम और पोटेशियम का स्तर को मापा गया। उन्होंने पाया कि सेंसर के जरिए व्यायाम के दौरान किसी व्यक्ति के शरीर से कितना पानी निकला है इसका पता चलता है। इसके अलावा सेंसर का उपयोग कर एक स्वस्थ और मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के पसीने के ग्लूकोज के स्तर और रक्त शर्करा के स्तर की तुलना की गई।
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)भारतीय मूल की शोधकर्ता मल्लिका बड़िया ने उम्मीद जताई है कि यह सेंसर भविष्य में मधुमेह में लगातार रक्त की जांच की जगह ले सकता है।
हालांकि, अभी यह पता चला है कि पसीने और शरीर के शुगर लेवल के बीच कोई परस्पर संबंध नहीं है। शोधकर्ताओं ने सेंसर के माध्यम से डायबिटीज के रोगियों के पसीने में शुगर लेवल का पता लगाया और पाया कि पसीने के शुगर लेवल से रक्त के शुगर लेवल का पता नहीं चल सकता है। ‘साइंस एडवांस’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने नए सेंसर डिजाइन का वर्णन किया है जिसके मुताबिक ‘रोल-टू-रोल’ प्रसंस्करण तकनीक का उपयोग इसे आसानी से निर्मित किया प्लास्टिक की सीट पर इस तरह से सेंसर बनाए जा सकते हैं जैसे कि कोई अखबार पर शब्दों की प्रिंट करता है।
