डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, 2023 को लागू करने के लिए फेडरेटेड लर्निंग, होमोमॉर्फिक एन्क्रिप्शन और डिफरेंशियल प्राइवेसी जैसी प्राइवेसी-एन्हांसिंग टेक्नोलॉजीज़ (PETs) का इस्तेमाल बेहद जरूरी है, यह बात कानून का मसौदा तैयार करने में शामिल एक वरिष्ठ आईटी मंत्रालय के अधिकारी ने कही है। भारत के डेटा संरक्षण कानून की यात्रा की तुलना कार खरीदने से करते हुए, आईटी मंत्रालय के साइबर लॉज और डेटा गवर्नेंस समूह के साइंटिस्ट ‘डी’ विकाश चौरसिया ने कहा, “अब हमें कार चलानी है।” उन्होंने आगे कहा, “यहीं पर हमें लगता है कि DPDP के कार्यान्वयन के लिए PETs हमारी मुख्य आधारशिला हैं। और इसी कारण हम संस्थानों और अकादमिक समूहों के साथ साझेदारी करने की उम्मीद रखते हैं।”
गुरुवार, 20 नवंबर को नई दिल्ली में Google India द्वारा आयोजित एक AI प्री-समिट कार्यक्रम में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों की मौजूदगी वाले एक पैनल में आईटी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी डी विकस चौरसिया ने यह कहा। यह कई ऐसे कार्यक्रमों में से एक है, जो भारत AI इम्पैक्ट समिट की तैयारी के तहत आयोजित किए जा रहे हैं। यह समिट फरवरी 2026 में आयोजित किया जाएगा और यह ग्लोबल साउथ में होने वाला पहला बड़े पैमाने का AI समिट होगा। बता दें कि पिछले एडिशन ब्लेचली पार्क, सियोल और पेरिस में आयोजित किए गए थे।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि प्राइवेसी एक ऐसी समस्या है जिसका हल यूजर स्तर की तुलना में इंजीनियरिंग स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। क्योंकि यूजर्स तो अंतिम उपभोक्ता है।” चौरसिया ने यह भी बताया कि वह अगले महीने चेन्नई में IIT मद्रास के सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल AI (CeRAI) जैसे हितधारकों के साथ लगातार बैठकों के अलावा भारत के डेवलपर्स के लिए ट्रेनिंग सेशन भी आयोजित करने वाले हैं।
आईटी मंत्रालय द्वारा DPDP नियम, 2025 की अधिसूचना जारी करने के कुछ दिनों बाद ही उनकी यह टिप्पणी सामने आई है, जिससे भारत में एक प्रभावी प्राइवेसी कानून लागू करने का रास्ता तैयार होता है। हालांकि, फिलहाल केवल कुछ ही प्रावधान लागू हुए हैं- जैसे सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम में संशोधन और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड (DPB) ऑफ इंडिया की स्थापना।
नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े अन्य प्रावधान- जैसे संस्थाओं द्वारा यूजर्स के व्यक्तिगत डेटा को प्रोसेस करने से पहले सूचित सहमति (informed consent) लेना और डेटा उल्लंघन (data breach) की स्थिति में यूजर को सूचित करना। ये केवल 18 महीने बाद लागू किए जाएंगे। हालांकि, यह अनुपालन समय-सीमा बड़ी टेक कंपनियों और स्टार्ट-अप्स के लिए अलग हो सकती है।
इसी बीच, गुरुवार के कार्यक्रम में Google ने भारतीय यूजर्स को ऑनलाइन नुकसान से बचाने के लिए अपने मल्टीडायमेंशनल AI-आधारित विजन की जानकारी किया। कंपनी ने अपने स्कैम प्रोटेक्शन प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में कई बड़े अपग्रेड की घोषणा की और CeRAI तथा CyberPeace Foundation जैसी संस्थाओं के साथ प्रमुख साझेदारियों के विस्तार की भी जानकारी दी।
स्कैम प्रोटेक्शन
भारत में ऑनलाइन स्कैम से निपटने की कोशिशों के तहत गूगल इंडिया ने पिक्सल फोन्स (Pixel Phones) में स्कैम डिटेक्शन फीचर रोलआउट करने का ऐलान किया है। यह फीचर Gemini Nano की क्षमताओं का इस्तेमाल रियल टाइम में कॉल्स को ऐनालाइज करने में करता है और डिवाइस पर ही संभावित स्कैम को पहचानता है। सबसे खास बात है कि ऐसा बिना ऑडियो रिकॉर्ड या ट्रांसक्रिप्ट्स या गूगल को डेटा भेजे बिना किया जाता है।
Google ने कहा, “यह फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहता है, सिर्फ अनजान नंबरों (जो कॉन्टैक्ट में सेव नहीं हैं) की कॉल पर लागू होता है, प्रतिभागियों को सूचित करने के लिए एक बीप बजाता है और यूजर इसे कभी भी बंद कर सकता है।” टेक दिग्गज ने यह भी बताया कि वह डिजिटल अरेस्ट स्कैम से निपटने के लिए एक नए फीचर का पायलट कर रहा है। पिछले कुछ महीनों में डिजिटल अरेस्ट मामलों में तेज़ी से वृद्धि देखी गई है।
Google ने कहा कि Android 11+ यूजर को यह फीचर तब एक स्पष्ट चेतावनी दिखाएगा जब वे किसी अनजान संपर्क के साथ अपनी स्क्रीन शेयर करने की कोशिश करेंगे। यूजर्स के पास एक वन-टैप ऑप्शन होगा जिससे वे कॉल को खत्म कर सकते हैं और स्क्रीन शेयरिंग रोक सकते हैं। यह फीचर Google Play, Navi और Paytm जैसे फिनटेक पार्टनर्स के सहयोग से डिवेलप किया गया है।
Google ने Enhanced Phone Number Verification (ePNV) नामक एक नया Android-आधारित सुरक्षा प्रोटोकॉल भी पेश किया जो SMS OTP प्रक्रिया को एक अधिक सुरक्षित, सहमति-आधारित, SIM-आधारित वेरिफिकेशन की जगह लेता है। इसके अलावा, कंपनी ने बताया कि Google Pay हर सप्ताह दस लाख से ज्यादा अलर्ट संभावित धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए दिखाता है।
Google Play Protect ने भी भारत में वित्तीय धोखाधड़ी के लिए अक्सर दुरुपयोग किए जाने वाले संवेदनशील परमिशन्स का इस्तेमाल करने वाले साइडलोडेड ऐप्स को इंस्टॉल करने के 11.5 करोड़ से अधिक कोशिशों को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया है।
