कीर्ती
जिस प्रकार इंसान अपने और अपने परिवार के लिए घर का निर्माण करता है, उसी प्रकार पशु-पक्षी भी सुरक्षा, धूप-छांव और बरसात से बचने के लिए एक सुनहरे घर यानी घोंसलों का निर्माण करते हैं। ये घोंसले हालांकि बनाए तो पक्षियों के द्वारा जाते हैं पर एक बार तो इंसान भी इन्हें देखकर चकित रह जाता है कि आखिर इतने सुंदर और कलात्मक अच्छे घोंसले का निर्माण कर सकता है। अपनी अद्भुत कला का परिचय देते हुए ये पक्षी अपने घरों का निर्माण करते हैं।
कुछ पक्षी अपना घोंसला बनाने में पौधों की पत्तियां, घास के अलावा कीचड़ का भी इस्तेमाल करते हैं। घास को कीचड़ के साथ सुखाने पर मजबूती आ जाती है। खेजड़ी और बबूल के पेड़ में उल्टा लटका हुआ बया का घोंसला वास्तव में कला का अद्भुत नमूना होता है, जिसमें न तो पानी जा सकता है और न ही किसी अन्य जानवर से कोई खतरा रहता है। घोंसले बनाने की कला इन पक्षियों को प्रकृति ने प्रदान की हैं जहां बया के घोंसले के समान कारीगरी वाला अन्य घोंसला नहीं होता, वहीं कठफोड़वा का घोंसला वृक्ष की कोटर में इस प्रकार बना होता है कि उसमें उसे छोड़कर कोई अन्य पक्षी प्रवेश तक नहीं कर सकता।
यह पक्षी अपनी चोंच के सहारे पेड़ के तने में धीरे-धीरे छेद करके इसे अंतिम रूप प्रदान करता है। उल्लू अपना घोंसला स्वयं नहीं बनाता है बल्कि किसी भी खाली पड़े घोंसले को देखकर वह उस पर अपना अधिकार जमा लेता है।
इन पक्षियों में एक बात और विशेष तौर पर सामने आई है कि इन घोंसलों का ज्यादातर निर्माण मादाएं ही करती है, जबकि नर पक्षी सामान जुटाने का कार्य करते हैं।
जो पक्षी ऊंचा उड़ते हैं और पहाड़ों आदि तक उड़ान भरते हैं, उनके घोंसले पहाड़ों और वृक्षों की चोटियों पर होते हैं। जैसे बाज, उकाब, गिद्ध आदि के घोंसले बहुत ऊंचाई पर मिलते हैं।
उसी प्रकार जो पक्षी मध्यम उड़ान भरकर लगभग जमीन के आसपास रहते हैं, उनके घोंसले वृक्षों के निचले हिस्सों में और कम ऊंचाई वाले वृक्षों पर बने होते हैं। तोता, मैना और गौरैया जैसे पक्षी बहुत कम ऊंचाई वाले वृक्षों पर अपने घोंसलों का निर्माण करते हैं। जल में पक्षी जैसे बत्तख, सारस, बगुला आदि अपने घोंसले जल क्षेत्रों के आसपास ही बनाते हैं। ०म
