बरसात का मौसम कई तरह की बीमारियां लेकर आता है। इस मौसम में नमी और पानी के कारण संक्रमण फैलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। पानी में पलने वाले मच्छरों के काटने से होने वाले रोगों के अलावा जीवाणुओं से पैदा होने वाले रोग जैसे डायरिया, हैजा और फूड प्वाइजनिंग का भी खतरा रहता है। इस मौसम में कभी उमस तो कभी ठंड के कारण फ्लू, सर्दी-जुकाम, बुखार, एलर्जी और इंफेक्शन का भी खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में जरूरी है कि शरीर की साफ-सफाई के साथ अपने पीने के पानी का भी विशेष ध्यान रखा जाए। कारण कि दूषित पानी अनेक तरह की बीमारियों को आमंत्रित करता है। भारत उन देशों में है, जहां जल जनित बीमारियां अधिक होती हैं। भारत में हर साल दो लाख से अधिक लोग पानी की कमी और प्रदूषण से जान गंवा बैठते हैं। नीति आयोग की पिछले साल प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार देश में उपलब्ध सत्तर फीसद जल दूषित है। वहीं पानी की गुणवत्ता में भारत एक सौ बाईस देशों की सूची में एक सौ बीसवें स्थान पर है।
मच्छर जनित रोग
मलेरिया- यह बरसात में होने वाली सबसे आम और गंभीर बीमारी है। यह जल जमाव से पैदा होने वाले मच्छरों के काटने से होता है। यह रोग मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है।
डेंगू- डेंगू बुखार बेहद खतरनाक होता है। यह भी मच्छरों के काटने से फैलता है। एडीज मच्छर के काटने से मरीज डेंगू से पीड़ित हो जाता है, जिससे मरीज के पूरे शरीर और जोड़ों में तेज दर्द होता है। डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं।
चिकुनगुनिया- चिकुनगुनिया भी मच्छरों से फैलने वाला बुखार है। यह एडीज ऐजिपेटी मच्छर के काटने से होता है। मच्छर काटने के तीन से सात दिन के अंदर इस बीमारी के लक्षण मरीज में दिखते है। इसमें मरीज के हाथ-पैर के जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द होता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थ पीना चाहिए।
बचाव के उपाय
’ घर की खिड़कियों पर जाल का प्रयोग करें।
’ अगर खिड़कियों पर जाल नहीं है, तो रात को सोते समय मच्छरदानी लगा कर सोएं।
’ मच्छर जनित रोगों से बचने के लिए अपने आसपास यानी घर, बालकनी, गमले, एसी या कूलर में पानी का जमाव न होने दें।
’ नालियों में डीडीटी का छिड़काव करवाएं।
’ इस मौसम में बच्चों को पूरी बाजू वाले कपड़े पहनाएं।
’ घर से बाहर निकलते समय ओडोमास क्रीम या ओडोमास स्टिकर का प्रयोग करें।
जीवाणु जनित रोग
डायरिया- डायरिया बरसात के मौसम में जीवाणुओं के संक्रमण से होने वाली आम बीमारी है। इसमें मरीज को पेट में मरोड़ होने के साथ ही दस्त लगना प्रमुख है। यह खासकर बरसात में प्रदूषित पानी और खाद्य पदार्थों के सेवन से होता है। इससे बचने के लिए साफ और ढंके हुए खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का ही सेवन करें।
हैजा- एक समय में हैजा बेहद खतरनाक बीमारी मानी जाती थी और गांव के गांव साफ हो जाया करते थे। हालांकि अब वैसे हालात नहीं हैं, लेकिन यह अब भी संक्रामक बीमारी है। विब्रियो कोलेरा नामक जीवाणु के कारण फैलने वाला यह रोग दूषित भोजन और पानी से फैलता है। हैजा में उल्टी और दस्त से मरीज की हालत खराब हो जाती है। शरीर में पानी और खनिज की कमी हो जाने पर मरीज को अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ सकता है। ऐसे मामले में चिकित्सक की सलाह लेना बेहद जरूरी है।
फूड प्वाइजनिंग- बरसात में फूड प्वाइजनिंग सबसे ज्यादा होती है। इस मौसम में घड़ी-घड़ी बदलाव होने से खाने-पीने की चीजें जल्द खराब हो जाती हैं और जब कोई व्यक्ति ऐसे आहार ग्रहण करता है तो वह फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो जाता है। इससे बचने के लिए बरसात में जितना हो सके बाहर का खाना-पीना और तली-भुनी चीजों को न कहना सीखें। ठंड लगना, पेट में दर्द, उल्टी और बुखार आना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।
बचाव के उपाय
’ नियमित रूप से व्यायाम करें।
’ पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पीएं।
’ सेहतमंद और पोषक आहार लें।
’ खाने-पीने की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
’ पानी उबाल कर और छानकर ही पिएं।
’ हाथ धोने के बाद ही कुछ खाए-पीएं।
’ देर से कटे फलों के सेवन से बचें।
’ कच्चा और अधपका मांसाहारी भोजन न करें।
