आरती सक्सेना
आपकी आने वाली फिल्म ‘दे दे प्यार दे’ में ऐसा क्या खास है, जिससे आप यह फिल्म साइन करने को तैयार हुए?
’यह पूरी तरह मनोरंजन से भरपूर एक पैकेज फिल्म है, जिसे देख कर दर्शक जरूर एन्जॉय करेंगे। इसमें सिर्फ कॉमेडी का तड़का नहीं है, बल्कि आदमी के एक इमोशनल इश्यू को प्रस्तुत किया गया है। एक मर्द जब पचास की उम्र के करीब पहुंचता है, तो उसके जीवन में फिर से प्यार करने के अरमान जाग जाते हैं। शायद यह इसलिए भी होता है क्योंकि वह कभी बूढ़ा नहीं कहलाना चाहता। एक जवान खूबसूरत लड़की से रोमांस करके वह इंसान अपने आप को भी उसी की उम्र का समझने लगता है। अपने इस झूठे प्यार में इतना खो जाता है कि वह समाज, घर-परिवार सबको कुछ समय के लिए भूल जाता है। उसके बाद उसको कितने ताने मिलते हैं, समाज के सामने कितना जलील होना पड़ता है, यह आपको इस फिल्म में देखने को मिलेगा। अगर सही शब्दों में कहंू तो इस फिल्म में प्यार के साइड इफैक्ट नजर आएंगे।
आपकी और तब्बू की जोड़ी को हमेशा से पंसद किया गया है। इस फिल्म में वे एक बार फिर आपकी पत्नी के रूप में नजर आने वाली हैं। उनके बारे में क्या कहेंगे आप?
’तब्बू और मैं पिछले पचीस सालों से अच्छे दोस्त हैं, इसलिए उसके साथ फिल्म करने में कभी कोई दिक्कत नहीं होती। हमारे बीच बहुत अच्छी ट्यूनिंग है। तब्बू अच्छी एक्ट्रेस है, इसमें कोई दो राय नहीं। ‘दे दे प्यार दे’ में भी उसने जोरदार अभिनय किया है। उसके साथ काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा है। हमेशा की तरह।
कॉमेडी और गंभीर अभिनय दोनों में आपकी पकड़ बहुत अच्छी है, जबकि लोगों का मानना है कि कॉमेडी करना आसान नहीं है। आप यह सब कैसे कर पाते हैं?
’मैं जब कोई फिल्म साइन करता हूं तो उसमें कॉमेडी या एक्शन या गंभीर किरदार नहीं, बल्कि अपने किरदार को समझता हूं और उसी हिसाब से काम भी करता हूं। सो, सब कुछ आसानी से हो जाता है। जैसे ‘दे दे प्यार दे’ में मैंने एक ऐसे आदमी का किरदार निभाया है, जो दो नावों पर सवार है। एक तरफ उसकी पत्नी है और दूसरी तरफ वह कमसिन लड़की है, जिसके प्यार में वह पड़ गया है। मैंने इस किरदार की दुविधा और परेशानी को समझते हुए अपना किरदार अच्छे से निभाने की कोशिश की है।
आपकी फिल्म ‘सिंबा’ को दर्शकों की बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली। इस फिल्म से कितना खुश हैं?
’बहुत खुश हूं। जाहिर है, मेरी फिल्म हिट होगी तो मुझे खुशी होगी। रणवीर सिंह ने फिल्म में बहुत अच्छा काम किया है। सारा अली खान ने भी टक्कर की एक्टिंग की है। मुझे खुशी है कि लोगों ने सिंबा में मेरी एंट्री बहुत पसंद की। मुझे भी इस फिल्म में काम करके बहुत मजा आया। सिंबा पूरी तरह मसाला फिल्म थी, जिसके साथ रणवीर सिंह ने पूरी तरह न्याय किया है।
आपकी ऐतिहासिक फिल्म ‘तानाजी’ कब तक रिलीज होने जा रही है? क्या ‘पद्मावत’ विवाद को देखते हुए आप इसे लेकर चिंतित हैं?
’नहीं, क्योंकि मेरी फिल्म में ऐसा कुछ है ही नहीं, जिसकी वजह से फिल्म विवाद में घिरे। इस फिल्म में कोई विवादस्पद दृश्य नहीं है। अगर फिर भी रिलीज या सेंसर के दौरान कोई समस्या आई, तो मुझे उसे सुलझाना आता है।
बतौर अभिनेता आप काफी सालों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं। आपकी तरह खान और कपूर अभिनेता भी काफी सालों से फिल्म उद्योग पर राज कर रहे हैं। क्या आने वाली स्टार पीढ़ी इस स्टारडम को कायम रख पाएगी, जैसे कि आप लोगों ने स्टारडम को बनाए रखा है?
’नहीं। अब वक्त काफी बदल गया है। आज के दर्शक समझदार हैं। वे स्टार देख कर नहीं, बल्कि कहानी और अच्छी फिल्म मेकिंग देख कर फिल्म देखने जाते हैं। हमारे जमाने में हमारे जो प्रशसंक हुआ करत थे, वे बहुत ईमानदार और समर्पित थे। वे अपने फेवरेट हीरो की फिल्म कई-कई बार देखने चले जाते थे। कई दर्शक ऐसे होते थे, जो अपने फेवरेट हीरो की ही फिल्म देखना पसंद करते थे। पर आज ऐसा नहीं है। इस हिसाब से तो नहीं लगता कि भविष्य में स्टारडम का दौर जारी रहेगा।
बतौर अभिनेता आपको कब अपनी लोकप्रियता का एहसास हुआ?
’मुझे अपनी लोकप्रियता का एहसास उस वक्त हुआ जब मैं अपनी पहली फिल्म ‘फूल और कांटे’ की रिलीज के दूसरे दिन गेटी गैलेक्सी थिएटर में वह फिल्म देखने गया था। उस वक्त मैं आगे की सीट पर ही बैठा हुआ। फिल्म में जैसे ही मेरी एंट्री हुई, थिएटर में मौजूद दर्शक जोर-जोर से ताली और सीटियां बजाने लगे। कुछ दर्शकों ने तो परदे के सामने सिक्के भी उछाले। उनमें से एक सिक्का मेरे सिर पर आकर लगा। वह सिक्का मैंने आज तक संभाल कर रखा है।
क्या ‘सिंघम’ और ‘गोलमाल’ की अगली सीक्वल देखने को मिलेगी?
’‘गोलमाल’ की सीक्वल बनानी है, लेकिन कोई अच्छी स्क्रिप्ट नहीं मिल रही है। सिंघम की सीक्वल पर काम चल रहा है। इसकी अगली कड़ी आपको जरूर देखने को मिलेगी।
आजकल वेब सीरीज का दौर है। वेब सीरीज को लेकर आपकी क्या राय है?
’मैं कई वेब सीरीज को फॉलो करता हूं। मुझे वेब सीरीज बहुत पंसद है। भविष्य में वेब सीरीज फिल्मों पर भारी पड़ने वाली है। अब हमें फिल्म निर्माण को लेकर और चैकन्ना रहना होगा। ऐसी फिल्में बनानी पड़ेंगी, जिन्हें देखने के लिए दर्शक थिएटर तक खिंचे आएं।
