कविता: आम पका
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
टपका-टपका अभी सामने,
बीच सड़क पर आम पका।
खेल-खेल में गप्पू के संग,
निकले थे मस्ती करने।
ब्रश मंजन कर निकल पड़े थे,
नगर भ्रमण गश्ती करने।
सड़क किनारे आम वृक्ष था।
खड़ा अदब से झुका हुआ।
छत के कंधे पर सिर रख कर,
पेड़ खड़ा मुस्काता था।
मीठे फल, आ जाओ, खिलाऊं,
कह कर हमें बुलाता था।
हम पहुंचे तो हमें देख कर
ठिल-ठिल कर वह खूब हंसा।
सिर को हिला हिलाकर उसने,
पके-पके फल टपकाए।
हम बच्चे भी बीन-बीन कर,
ढेर आम घर पर लाए।
गिरते एक आम को मैंने,
अपने हाथों में लपका।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
पछाड़ना / पछोरना
हराने के अर्थ में पछाड़ना शब्द का प्रयोग किया जाता है। किसी प्रतियोगिता या प्रतिस्पर्द्धा में जब कोई अपने प्रतिद्वंद्वी को हरा देता है तो उसे पछाडना कहा जाता है। जबकि पछोरना वह क्रिया है, जिसमें अनाज के खर-पतवार, भूसी वगैरह को फटक कर निकाला जाता है।
पाहन / पाहुन
पत्थर का पर्याय है पाहन। यह संस्कृत के पाषाण शब्द के घिसने से बना है। जबकि पाहुन का अर्थ है अतिथि, मेहमान। कुछ इलाकों में दामाद को भी पाहुन या पहुना कहते हैं। पाहुन बहुत सम्मनजनक शब्द है।
