शिखर चंद जैन
नन्हा डायमंड अपने माता-पिता के साथ अस्तबल के ऊपर बने एक घर में रहता था। एक दिन डायमंड को मीठी नींद आ रही थी। तभी हवा के तीखे, ठंडे झोंके से उसकी नींद खुल गई। डायमंड को लगा कोई उसका नाम लेकर पुकार रहा है। उसने चारों तरफ देखा। कोई नहीं दिखा। फिर आवाज आई-मैं उत्तरी हवा हूं। चलो तुम्हें घुमा लाऊं।
डायमंड बिस्तर से निकलकर उत्तरी हवा के साथ चल पड़ा। उत्तरी हवा ने उसे अपनी पीठ पर बिठा लिया। वह हवा के साथ उड़ रहा था। तभी उसे अपने माता-पिता के मालिक कोलमैन का घर नजर आया। हवा की पीठ से उतर कर वह उस तरफ बढ़ा। घर के सब लोग सो रहे थे। तभी कोई आवाज सुनकर उसने पीछे देखा। उत्तरी हवा गायब हो गई। डायमंड रोने लगा। उसकी आवाज सुनकर कोलमैन की बेटी बाहर आई और डायमंड को उसके घर छोड़ आई।
कुछ दिनों बाद उत्तरी हवा फिर आ गई। डायमंड बहुत खुश हुआ। उत्तरी हवा ने एक सुंदर लड़की का रूप धर लिया। डायमंड उसके साथ चल दिया। उत्तरी हवा बोली-आज लंदन जाकर शहर को साफ करना है, तुम मेरा हाथ पकड़े रहना। थोड़ी देर में वे लंदन पहुंच गए। डायमंड ने तेजी से सांय-सांय की आवाज सुनी। उत्तरी हवा से पूछने पर वह बोली-मैं तेजी से झाड़ू लगा रही हूं, यह उसी की आवाज है। डायमंड लंदन शहर देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। उसी समय डायमंड ने देखा, सड़क पर खड़ी एक लड़की तेज हवा के कारण परेशान थी। डायमंड का मन पिघल गया। उसने उत्तरी हवा से उसकी सहायता करने का अनुरोध किया। उत्तरी हवा बोली-तुम बहुत दयालु हो। मैं तुम्हें यहीं छोड़ देती हूं, तुम उस लड़की की सहायता करो।
सड़क पर खड़ी लड़की डायमंड को देखकर चौंक उठी, क्योंकि हवा के छोड़ने के कारण डायमंड अचानक ही उसके सामने प्रकट हो गया था। डायमंड ने उसे अपना परिचय दिया और उत्तरी हवा के बारे में बताया। उस लड़की को डायमंड की बात पर भरोसा नहीं हुआ। उसने डायमंड को कहा-भला ऐसा भी कहीं होता है? चलो, तुम अपने घर जाओ, मैं अपने घर जाती हूं। सुबह होने पर दोनों चल पड़े। चलते-चलते एक मकान के पिछवाड़े पहुंचे। डायमंड ने दरवाजे को धक्का दिया। दरवाजा खुल गया। सामने एक बाग था। डायमंड हैरान रह गया। यह तो उसी के घर का बगीचा था। उसने लड़की को भीतर बुलाया, पर वह चली गई।
कई दिन बीत गए। एक शाम डायमंड किसी बाग में घूम रहा था। उसने देखा-एक फूल से भौंरा उड़ा और हवा में विलीन हो गया। तभी एक बारीक आवाज सुनाई पड़ी। डायमंड ने पूछा-तुम कौन बोल रही हो? क्या तुम कोई परी हो?
-नहीं, मैं इस फूल पर बैठी हूं।
डायमंड ने इस आवाज की दिशा में देखा तो एक फूल पर उसे एक नन्ही सी तितली नजर आई। तितली फिर बोली-तुमने मुझे पहचाना नहीं, मैं उत्तरी हवा हूं। आज रात मुझे एक जहाज डुबोना है। डायमंड बोला-यह तो बुरा काम है। तुम तो दयालु हो फिर जहाज क्यों डुबोओगी? उत्तरी हवा ने कहा-तुम नहीं समझ पाओगे। चलो मेरे साथ। उत्तरी हवा ने एक सुंदरी युवती का रूप धारण कर लिया। उसने डायमंड को गोद में उठा लिया और उड़ चली। थोड़ी ही देर में वे समुद्र तट पर पहुंच गए। पास ही एक गिरजाघर था। हवा ने डायमंड को गिरजाघर में भेज दिया।
डायमंड थक गया था। उसे नींद आ गई। पर कुछ आवाजों से वह जाग गया। उसने देखा तीन संत आपस में उसी के बारे में बात कर रहे थे। वे कह रहे थे-जरूर यह उत्तरी हवा की करामात है। वही इस बच्चे को लाकर यहां छोड़ गई है। डायमंड चाहता था कि वह संतों से उत्तरी हवा के बारे में बातें करे। तभी अचानक अंधेरा छा गया। न वहां गिरजाघर था, न कोई संत। वह पुआल पर लेटा था। अभी सुबह नहीं हुई थी। कुछ दिनों बाद डायमंड अपने माता-पिता के साथ सैंडविच नामक एक बंदरगाह पर गया। वहां उसकी मौसी रहा करती थी। रात को डायमंड लेटा हुआ था। तभी उत्तरी हवा आ गई। डायमंड झट् से उसकी पीठ पर सवार हो गया। इस बार उत्तरी हवा उसे बहुत दूर ले गई। डायमंड ने देखा-वह समुद्र के ऊपर उड़ रहा था। समुद्र में एक नौका थी। हवा बोली-मैं तुम्हें नाव के पाल पर लिटा दूंगी। तुम डरना मत। उसने ऐसा ही किया। डायमंड को लगा, जैसे वह किसी झूले में लेटा है। डायमंड को नींद आ गई थी। तभी बर्फीली हवा के झोंके से उसकी नींद खुली। उसने एक विशाल जहाज को आते देखा। उत्तरी हवा बोली-वह जहाज उत्तरी ध्रुव जा रहा है। अब हम लोग उस जहाज पर यात्रा करेंगे।
हवा ने उसे गोद में लेकर जहाज पर पहुंचा दिया। डायमंड ने देखा, जहाज के आसपास बर्फ की चट्टानें तैर रही हैं। उत्तरी हवा ने डायमंड को एक चट्टान की गुफा में पहुंचा दिया। डायमंड डर गया। उत्तरी हवा कुछ ही देर में लौटने को कह गई थी। जब वह लौटी तो डायमंड उसका चेहरा देखकर घबरा गया। वह बीमार लग रही थी। डायमंड ने पूछा तो वह बोली-नहीं मैं किसी का इंतजार कर रही हूं।
डायमंड ने इच्छा जताई-मैं तुम्हारी पीठ के पीछे स्थित प्रदेश को देखना चाहता हूं। उत्तरी हवा ने उसे अपने बीच से गुजरने को कहा। डायमंड हवा के बीच से गुजरते समय बेहोश हो गया। जब उसकी आंख खुली तो वह एक अनजान प्रदेश में था। बड़ा जादुई था वह प्रदेश। इस प्रदेश में डायमंड कई दिनों तक रहा। जब वह अपने माता-पिता को देखना चाहता था तो एक खास तरह के पेड़ पर चढ़ जाता। वहां से वह अपने माता पिता को आसानी से देख सकता था।
एक दिन वह पेड़ पर बैठा था। अचानक उसे उत्तरी हवा की याद आई। वह पेड़ से नीचे उतर आया। पर यह क्या? सारा प्रदेश गायब हो गया। डायमंड हैरान था। क्यों मजा आया? किसी ने पीछे से कहा। डायमंड ने मुड़कर देखा। पीछे एक युवती खड़ी थी। उसने डायमंड को गोद में उठाया और दक्षिण की ओर उड़ चली। धीरे-धीरे डायमंड को नींद आ गई। नींद खुली तो डायमंड ने देखा, उसकी मां उस पर झुकी हुई थी। डायमंड ने आंख खोली तो वह फूट फूटकर रो पड़ीं। बोली-तुम कितने बीमार थे बेटे।
मां मैं तो उत्तरी हवा के साथ घूमने गया था। डायमंड ने मासूमियत से कहा। मां बोली-नहीं तुम बेहोश थे। तभी वहां डॉक्टर साहब आ गए। उन्होंने कहा-अब आपका बेटा ठीक हो रहा है।
कुछ ही दिनों में डायमंड स्वस्थ हो गया। वह अपने माता पिता और छोटे भाई के साथ लंदन गया। यात्रा के दौरान उसे अक्सर उत्तरी हवा की याद आती। रात में कभी-कभी उत्तरी हवा उसके पास आती भी थी। पर और किसी को इस बात का पता नहीं था। बस, डायमंड ही जानता था।
