वैज्ञानिक इस तथ्य के प्रति एक तरह से आश्वस्त हैं कि दूसरे ग्रहों पर जीवन है और वहां प्राणी रहते हैं। वैसे भी अनंत अंतिरक्ष में असीम संभावनाएं हैं। वैसे भी जब पृथ्वी पर लगभग चार अरब साल पहले जीवन की उत्पत्ति हुई थी, तब का एक जीवाश्म वैज्ञानिकों को मिला है। इसे जीव की उत्पत्ति का कारक माना जा रहा है। इससे पहले, पृथ्वी अत्याधिक गर्म पिंड के समान थी। बाद में वह ठंडी हुई और जीवन पनपने के लिए पांच तत्व विकसित हुए। जो प्रक्रिया पृथ्वी पर चली, वही अन्य ग्रहों पर भी हुई। नतीजतन वे ग्रह भी जीवन के लायक बन गए और पराग्रही प्राणी रहने लग गए।

अब प्रश्न उठता है कि ऐसे कौन से ग्रह हैं, जहां जीवन संभव है या पूर्व से ही जीव अस्तित्व में हैं। इस सवाल पर और आगे बढ़ने से पहले यह समझना भी जरूरी है कि जीव की उत्पत्ति के लिए यह भी आवश्यक है कि जिस ग्रह पर जीवन है, उसका सूर्य के साथ विशेष संबंध हो। पृथ्वी के सौरमंडल में मौजूदा नौ ग्रहों में से केवल पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है, जिसका सूर्य के साथ साम्य है। पृथ्वी के अलावा ऐसी दूसरी संभावना मंगल के साथ है। चूंकि पृथ्वी की आकाशगंगा में असंख्य ग्रह हैं, तो ऐसा क्यों नहीं हो सकता कि वहां किसी ग्रह पर जीवन हो। यदि एक हजार में एक ही ऐसा ग्रह हो, जिसमें पृथ्वी के समान जीवन हो तो भी कम से कम एक करोड़ ऐसे ग्रह पृथ्वी की आकाशगंगा में होने चाहिए, जिनमें वर्तमान पृथ्वी जैसी उन्नत सभ्यता और तकनीक की उम्मीद की जा सकती है। यह संभावना हमें एलियंस के अस्तित्व और उनसे जुड़े रहस्यों के और करीब ले आती है।
एलियंस से जुड़ी गुत्थी

दिलचस्प है कि हमारे ही नहीं, विश्व के प्रत्येक प्राचीन धर्म की पौराणिक कथाओं में सुदूर ग्रह या लोकों के देवताओं के पृथ्वी पर आने-जाने का उल्लेख मिलता है। एलियंस के आ रहे चित्रों, विज्ञान-कथाओं व फिल्मों में जीवंत पात्र की भूमिका ने इसकी एक काल्पनिक छवि हमारी स्मृति में उकेर दी है। इनके अस्तित्व और मानव सभ्यता पर इसके प्रभाव को लेकर शोध निरंतर जारी हैं।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने एलियंस से संपर्क नहीं करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने इन्हें पृथ्वी पर मानवीय अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बताया था। उनकी आशंका थी कि एलियंस हमसे बेहतर तकनीक वाले जीव हो सकते हैं। हालांकि कई वैज्ञानिकों ने इस आशंका को निर्मूल बताया है। खैर, साहसी लोग शंकाओं की परवाह किए बिना आगे बढ़ते हैं। गोया, आज अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन हैं, जो ब्रह्मांड की गुत्थियों को सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं। चंद्रमा के बाद मनुष्य मंगल पर पहुंचने का रास्ता प्रश्स्त करने में लगा है। हालांकि अभी तक जीवंत रूप में कोई पराग्रही चंद्रमा और मंगल पर सक्रिय उपग्रहों की दृष्टि में नहीं आया है और न ही मनुष्य के जीवन के जीवनदायी तत्व पानी की उपलब्धता देखने में आई है। बावजूद खगोल विज्ञानी शक्तिशाली दूरबीनों और उपग्रहों के माध्यम से अनंत आकाश के किसी ग्रह पर मानवीय बसाहट की उम्मीद से ब्रह्मांड को खंगाल रहे हैं। संभव है, इसी तलाश में कोई पराग्रही जीव अंतरिक्ष में लगे कैमरे में भी कैद हो ही जाए।

वैसे कई जीवविज्ञानियों का मानना तो यहां तक है कि अतीत में सुदूर ग्रहों से परलोकीय प्राणी पृथ्वी पर आए थे और उन्होंने ही पृथ्वीवासी मनुष्य को सभ्य होने का रास्ता दिखाया था। अब हमारे पुराणों में तो जितने देवता हैं, उनका निवास परलोक ही है। इस परलोकीय स्वर्ग के राजा इंद्र हैं। जब भी कोई पराक्रमी अपने तप बल से इस लोक की ओर जाने को उद्यत होता है, तो बेचारे इंद्र का सिंहासन डोलने लग जाता है। तब परलोकवासी ब्रह्मा, विष्णु और महेश इंद्र को मदद का आश्वासन देते हैं और फिर पराक्रमी देव हों या दानव या फिर मानव उसे परलोक की ओर जाने से रोक देते हैं। देवता धरती व अन्य ग्रहों पर अपने आकाशगामी यानों से आया-जाया करते थे। दिलचस्प है कि आज वैज्ञानिक एलियन की सच्चाई को समझने के लिए पराग्रही देवताओं के काल्पनिक व अविश्वसनीय से लगने वाले अस्तित्व में भी झांक रहे हैं। उन्हें लगता है कि संभव है कि इससे उन्हें सच्चाई तक पहुंचने का कोई सूत्र मिल जाए।