चमत्कार
मैं वही कर सकता हूं
जो मुझे दिया गया है।
ऐसा नहीं है कि मैं ऐसा चाहता हूं
विकल्प और चुनाव
वे दूर से सुनाई पड़ने वाली आवाजों में खो जाते हैं
जैसे हवा उल्टी दिशा से बह रही हो
लगता है कि समय बीत रहा है
कितना अंधकार सह सकता है एक आदमी
कितनी हत्याएं
कितनी दुर्घटनाएं
कितनी त्रासदियां
कितनी यंत्रणाएं
शरीर पर घाव और उससे ज्यादा मन पर
फिर से सिर उठाने आंखें खोलने
देखना समझना सोचना शुरू करने
इच्छाशक्ति के बिलकुल मर जाने के ठीक पहले तक
कितना सह सकता है एक आदमी
कहां तक हैं इसकी हदें
कितने आघातों के बाद मर जाएंगी आशाएं
खत्म ही हो जाएगा भरोसा हमेशा के लिए
दुख के इतिहास में दर्ज है वृत्तांत
और उससे ज्यादा स्मृतियों में
पीढ़ी दर पीढ़ी बांचते रहने पर भी पूरे नहीं होते
बने रहते हैं प्रासंगिक
और धीरे-धीरे बदल जाते हैं एक घोष में
किसी चमत्कार की तरह।
अचानक जाना पड़ा तो
जाना पड़ा तो क्या लेकर जाऊंगा
किसी दस्तावेज पर पुरानी लिपि में संकेत, चिह्न, चित्र
बचपन के सपने में चलते रहने वाला पहिया
कलाई में बंधा कोई रंगीन धागा
अचानक जाना पड़ा तो क्या छोड़ूंगा
खेत खलिहान, ढोर ढंगर, बंद घर की चाबी
चिड़ियों की कतार
वापस आने का भरोसा
आजकल कभी-कभी चला जाता हूं स्टेशन
देखता हूं, वे सुबह-सुबह झोला गठरी लिए हुए
और उतरते ही चेकिंग में पकड़ लिए जाते हैं,
मन में आता है उनके सामान देख सकूं
क्या लेकर आए होंगे
बस ऐसे ही,
अनुमान लगाता हूं वे क्या-क्या छोड़कर आए होंगे
पिछली की पिछली शताब्दी में जो हुआ
पिछली शताब्दी में और इस शताब्दी में भी
पुराने नए झगड़ों के चलते
तबाही के बाद पनाह के लिए
बच्चों के लिए
बचे रहने के लिए
बहुत थोड़ा-सा सामान और बहुत भारी बोझ लादे
मैदान और पहाड़ नदियां और समुद्र पार कर।
बीज
रेलिंग की धूल मिट्टी में पुल पर गेहूं का छोटा-सा पौधा
बाली शान से सिर उठाए हुए
उसके ठीक बगल में सरसों का छोटा-सा पौधा थोड़े से
फूल लिए हुए
यह फ्लाईओवर सीधे हाइवे पर गिरता था
किसने डाले होंगे फ्लाईओवर पर बीज
या किसकी पोटली से गिरा होगा
जा चुकी थीं सर्दियां और होली के आने की आहट थी
बेमौसम की बारिश ने खेती का जो भी नुकसान किया होगा
उसने सींच दिया उन बीजों को।
देख कर हैरानी तो हुई लेकिन आश्वासन भी था
बीज कहीं भी डाले जाएं
उग आएंगे, फूलेंगे और अपना काम जारी रखेंगे। ०
