बागवानी का शौक लगभग सभी को होता है। घर में चाहे दो गमले रख कर उसमें अपनी पसंद के पौधे रोप कर कोई अपने शौक पूरे करता है, तो कोई खाली जगह में फूलदार पौधे, सब्जियां वगैरह उगा कर। आजकल छत के ऊपर बागवानी का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि घर के बाहर अब लॉन जैसी जगहें शहरों में मिल ही नहीं पातीं। कई लोग बालकनी के किनारों पर गमले रखने की जगह निकाल लेते हैं, तो कुछ लटकने वाली टोकरियों में पौधे रोप कर घर के अंतर हरियाली और खिलखिलाती रंगत रचने का प्रयास करते हैं। कई लोग खुद पौधे रोपने से लेकर उनकी देखभाल करने तक की जिम्मेदारी संभालते हैं, तो कुछ लोग माली की मदद लेते हैं। जो लोग खुद पौधों की देखभाल करते हैं, स्वाभाविक ही उन्हें बागवानी का सुख कुछ अधिक मिलता है। मगर कई लोगों को पौधों की देखभाल के बारे में सही जानकारी नहीं होती और वे पौधों में सिर्फ पानी देते रहना या कभी-कभार गुड़ाई वगैरह कर देना ही बागवानी समझते हैं। अगर वे पौधों की देखभाल के कुछ नुस्खे जान जाएं, तो उनका बागवानी का आनंद और बढ़ जाएगा।
सर्दी में देखभाल
इस मौसम में कई पौधे हवा के सर्द थपेड़े, कोहरे और कभी-कभार बारिश झेलते हुए कमजोर पड़ने लगते हैं। उनकी जड़ों में जमा पानी जल्दी न सूख पाने की वजह से उनका विकास रुक जाता है। ऐसे पौधों की गुड़ाई, उनमें खाद वगैरह डालने की जरूरत होती है। अगर पौधे गमले में रोपे गए हैं, तो उनकी मिट्टी बदलने, गमले बदलने की भी जरूरत होती है। फूलदार पौधों की छंटाई और नरम टहनियों को सहारा देना भी जरूरी होता है। अगर फलदार पौधे हैं, सब्जियां आदि बोई गई हैं, तो उनकी भी देखभाल की जरूरत होती है।
यह मौसम यों तो फूलों वाले पौधों का है। इस समय गुलदाउदी, डेहलिया आदि फूलते हैं। कई फूलदार पौधे इस मौसम में ही रोपे जाते हैं। इनके पौधों की देखभाल बहुत जरूरी होती है।
बसंत की आहट पछुआ हवा में खुनक से सुनाई देने लगती है। इस मौसम में एक बार पौधों की गुड़ाई कर दो से तीन दिन तक मिट्टी को सूखने देना चाहिए। सर्दी में ओस और ठंडी हवा के कारण पौधों के नीचे नमी लगातार बनी रहती है, वह नमी दूर होते ही पौधों में फूलों की रंगत बढ़ने लगती है। इसलिए अगर पौधे गमलों में लगा रखें हैं, तो इस मौसम में सारो गमलों को इकट्ठा कर उनके पौधों की पीली पड़ गई या गल रही पत्तियों को तोड़ कर साफ कर दें। अगर जड़ों में अतिरिक्त या अनावश्यक कल्ले फूटने लगे हैं, तो उन्हें काट दें। फिर देखें कि पौधों की जड़ें अधिक तो नहीं फैल गई हैं। डेहलिया, गुलदाउदी आदि इस मौसम के फूलों की जड़ों को न छेड़ें, पर गुड़हल, क्रोटन, फर्न, तुलसी, कैक्टस आदि की जड़ों का जायजा जरूर लें। अगर उनकी जडें अधिक फैल गई हैं, तो गमले की मिट्टी बदलें। अतिरिक्त फैल गई जड़ों को काट कर अलग कर दें।
इसी तरह अगर पौधे जमीन में लगे हैं, तो उनका भी निरीक्षण करें। उनकी जड़ों को काटने की जरूरत नहीं पड़ती, पर मिट्टी को भुरभुरी बनाए रखना जरूरी होता है, इसलिए उनके सड़े-गले-पीले पड़े पत्तों को निकाल कर गुड़ाई करें और खाद वगैरह डालें।
खाद और मिट्टी
पौधों की सेहत के लिए मिट्टी और खाद की गुणवत्ता का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। मिट्टी वही लेनी चाहिए, जो खेती वाली जगह से उठाई गई हो। अक्सर मकान बनाने के लिए की गई खुदाई वाली मिट्टी उठा कर गमलों में डाल दी जाती है। पर मिट्टी वही अच्छी और उपजाऊ होती है, जो पृथ्वी की सतह के आधे फीट तक की गहराई से ली गई होती है। उसी में पौधों के लिए बैक्टीरिया पनपते हैं। अधिक गहराई से ली गई मिट्टी उपजाऊ नहीं होती।
इसी तरह फूलदार और फलदार पौधों के लिए गोबर और कंपोस्ट खाद उत्तम होती है। अगर वर्मीकल्चर उपलब्ध हो, तो सबसे उत्तम। गोबर की खाद इस्तेमाल करते समय हमेशा ध्यान रखें कि वह पूरी तरह सड़-गल कर काली पड़ चुकी हो, नहीं तो उसमें कीड़े पैदा होकर पौधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आजकल शहरों की नर्सरियों में वर्मीकल्चर आसानी से मिल जाती है, उसका उपयोग करें। घर पर भी सब्जियों, फलों के छिलकों से खाद बनाई जा सकती है। इसके लिए अब को अलग किस्म के गमले और बाल्टियां बाजार में उपलब्ध हैं। अगर आपके घर के बाहर खुली जमीन है, तो वर्मीकल्चर भी बना सकते हैं। वर्मीकल्चर यानी केचुओं से पैदा हुई खाद।
साग-भाजी
अब लोग घर में कुछ हरी सब्जियां उगाना पसंद करते हैं। जिन लोगों के पास घर के बाहर जमीन है या खुली छत है, वे कुछ अधिक सब्जियां उगा लेते हैं, पर जिनके पास ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है, वे भी बड़े गमलों में हरी पत्तेदार और कुछ रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली धनिया, पुदीना, पालक, मेथी, हरा प्याज वगैरह उगा लेते हैं।
इस मौसम में उगने वाली सब्जियों की देखभाल बहुत जरूरी होती है, नहीं तो उनमें फल नहीं आ पाते, मौसम बदलने के साथ उन पर कीट-पतंगों का हमला बढ़ जाता है। सब्जियों के पौधों की हर हफ्ते गुड़ाई जरूर करें। मिट्टी को भुरभुरी रखें। ज्यादा पानी न दें। मिट्टी में हवा और धूप पहुंचती है, तभी पौधों की सेहत अच्छी बनी रहती है। साग-भाजी के पौधों में खाद और मिट्टी की गुणवत्ता अच्छी रखें। इस मौसम में उनमें गोबर की खाद या कंपोस्ट जरूर डालें।
एक लीटर पानी में एक बड़ा चम्मच नमक घोलें और इसे स्प्रेअर में भर कर हफ्ते में कम से कम एक पौधों के पत्तों पर छिड़कें। इस मौसम में कुछ ऐसे कीट पैदा होते हैं, जो पौधों के पत्तों पर चिपक कर उनके धूप और हवा से पोषण खींचने की प्रक्रिया को बाधित कर देते हैं। टमाटर, बैगन जैसे पौधों पर ऐसे कीट का हमला अधिक देखा जाता है। कोई रासायनिक घोल छिड़कने से बेहतर है कि पौधों पर नमक घुला पानी छिड़कें। इसे पत्तों की अच्छी तरह धुलाई भी हो जाती है और उन्हें कीड़े नहीं खाते। पौधों के पत्ते स्वस्थ रहते हैं तो प्रकाश संश्लेषण से वे अच्छी तरह अपनी खुराक बना पाते हैं।
पौधों को सहारा दें
इस मौसम में कुछ फूलदार पौधों में इतने अधिक फूल खिलते हैं कि उनकी टहनियां उनका भार उठा नहीं पातीं। फिर जब तेज हवा चलती है, तो वे अक्सर टूट जाते हैं। डेहलिया और गुलदाउदी के पौधों में यह समस्या अधिक देखी जाती है। डेहलिया के फूल भारी होते हैं, इसलिए उसकी टहनियों का ध्यान रखना जरूरी होता है। इसके लिए बांस की पतली खप्पचियां लगा कर फूलों की टहनियों को सहारा दें।
इसी तरह गुड़हल, बोगनबेलिया आदि के पौधों में अगर टहनियां अधिक निकल आई हैं, तो उन्हें काट कर अलग कर दें। इस तरह उसकी टहनियां मजबूत होंगी और फूल भी अधिक निकलेंगे।
इस मौसम में सबसे अधिक ठंड का प्रकोप तुलसी के पौधे पर देखा जाता है। अक्सर घरों में तुलसी के पौधे लगाए जाते हैं, पर तुलसी बहुत कोमल वनस्पति है और वह सर्दी के थपेड़े सहन नहीं कर पाती। कई लोग तुलसी को रोज जल चढ़ाते हैं, जो सर्दी के कारण सूख नहीं पाता और तुलसी की जड़ों में जमा होकर उसे गला देता है। इसलिए इस मौसम में तुलसी की देखभाल बहुत जरूरी होती है। यों तो कड़ाके की सर्दी पड़ने से पहले ही रात को तुलसी को कपड़े से ढंक कर रखना चाहिए, पर अगर ऐसा करने से आप चूक गए हैं और उसके पत्ते गल कर गिरने शुरू हो गए हैं या तुलसी सूखने लगी है, तो तुरंत उसके गमले की मिट्टी बदलें। अगर पौधा काफी कमजोर हो गया है, तो उसमें कुछ रासायनिक खाद का भी उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए एक लीटर पानी में यूरिया के पांच से सात दाने घोल कर तुलसी की जड़ों में डालें। तुलसी में हरियाली लौटनी शुरू हो जाएगी। मिट्टी को भुरभुरा बनाए रखें और अधिक पानी न दें। तुलसी पर फूल निकल आए हैं, तो उन्हें काट कर अलग कर दें। ०
