मधुर मोहन मिश्र
नानी के घर
छुट्टी मनाएं नानी के घर।
पेड़ों के नीचे झट सो जाएं
खेतों में छुप कर हम खो जाएं।
खूब करें हम भागा दौड़ी
खेलें, टिप्पू, लंगड़ी घोड़ी।
गन्ने खाएं नानी के घर।
भरी दुपहरी झूला झूलें
गाय की बछिया चुपके से छू लें।
तालाबों मे छप्पा छप्पी
रात मे खेलें आइस पाइस धप्पी।
शोर मचाएं नानी के घर।
घोल घोल के सत्तू खाएं
बूढ़े बरगद पर चढ़ जाएं।
धूल भरी गलियों में घूमें
ढोल बजाएं नाचें झूमें।
मामा चिढ़ाएं, नानी के घर।
छुट्टी मनाएं नानी के घर।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
कुल्या / कुल्ला
नाली या खेतों में पानी पहुंचाने के लिए मुख्य नहर से निकाल करे बनाई गई छोटी नहर को कुल्या कहते हैं। जबकि मुंह साफ करने के लिए मुंह में पानी भर कर फेंकने की क्रिया को कुल्ला कहते हैं।
चपल / चप्पल
ऐसा व्यक्ति जो एक जगह स्थिर नहीं रहता, उसमें चंचलता, चुलबुलापन, उतावलपन अधिक हो, उसे चपल कहते हैं। जबकि चप्पल पैरों में पहने जाने वाले एक प्रकार के खुले जूते को कहते हैं। आप चप्पल से भलीभांति परिचित हैं
