बरसात में भोजन जितना हल्का करें, उतना अच्छा। तला हुआ और गरिष्ठ भोजन कम करें, तो पेट संबंधी समस्या उतनी ही कम होगी। खासकर नाश्ते में अंकुरित और उबला हुआ या भाप में बना भोजन करना ज्यादा उचित होता है। पिछले हफ्ते हमने कुछ भाप में पके और उबले हुए देसी नाश्ते के बारे में बात की थी। इस बार कुछ और देसी नाश्ते।

दाल फरा

फरा या फर्रा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय व्यंजन है। यह चावल के आटे से बनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में इसे बनाने के मुख्यरूप से दो तरीके हैं- मीठा और नमकीन। पर ऐसा नहीं कि यह सिर्फ छत्तीगढ़ में बनाया और खाया जाता है। देश के दूसरे राज्यों में भी इसे खाया जाता है। छत्तीसगढ़ में मीठा फरा बनाने के लिए चावल के आटे को गरम पानी से कड़ा गूंथ कर मोटी बत्तियों जैसे आकार में गन्ने के उबलते रस में पकाते हैं। नमकीन फरा बनाने के लिए आटे में नमक, मिर्च वगैरह मिला कर गूंथते हैं और फिर उबलते पानी के भाप में उसे पका लेते हैं। फिर उसमें राई और कढ़ी पत्ते का तड़का ऊपर से डाल देते हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में चने की दाल भर कर फरा बनाया जाता है। इन राज्यों में इसे फर्रा या पिट्ठा भी कहा जाता है।

विधि

दाल फरा बनाने के लिए सबसे पहले चने की दाल को चार-पांच घंटे के लिए भिगो दें। फिर उसे छान कर सिलबट्टा, खरल या मिक्सर में दरदरा पीस लें। उसमें नमक, लाल मिर्च पाउडर, कटा हुआ हरा धनिया, हरी मिर्च, धनिया पाउडर मिलाएं और पिट्ठी तैयार कर लें। अब चावल का आटा लें। उसे गुनगुने पानी से गूंथ लें। हाथ पर तेल लगा कर रोटी की तरह फैला लें और उसमें दाल की पिट्ठी भर कर ठीक से बंद कर दें। अगर हाथ से बनाने में दिक्कत आ रही हो तो गुझिया बनाने वाले खांचे में रोटी को फैलाएं और उसमें दाल पिट्ठी भर कर ठीक से बंद कर लें।

अब स्टीमर में पानी गरम करें। भाप उठने लगे तो भरे हुए दाल फरों को ट्रे में रख कर पकने के लिए रख दें। करीब पंद्रह मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। अगर स्टीमर नहीं है तो कुकर में भी फरे बनाए जा सकते हैं। कुकर की सीटी उतार दें। तले में पानी भरें और उसमें एक कटोरी रख कर उसके ऊपर स्टील की छन्नी में फरे रख कर पकने को रख दें। फरे पक जाएं तो उन्हें एक थाली में निकाल लें। अब किसी कटोरी या कलछी में एक चम्मच घी गरम करें। उसमें राई और कढ़ी पत्ते का तड़का लगाएं। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें थोड़ा-सा पानी और चीनी डाल कर उबाल लें। इस तड़के को फरों के ऊपर सावधानी से डालें, ताकि वह सारे फरों पर फैल जाए।

इसके अलावा चाहें तो हरी मिर्च, हरा धनिया और अदरक के महीन लच्छे काट कर इसे सजा सकते हैं। यह सुबह या शाम किसी भी वक्त खाने लायक उत्तम नाश्ता होता है। चाहें तो इसे भोजन के रूप में भी खा सकते हैं। इसके साथ टमाटर-धनिया की चटनी अच्छी लगती है। इस मौसम में अरबी के पत्ते सहज उपलब्ध होते हैं। यों ये पत्ते हर मौसम में मिलते हैं, पर इस मौसम में नरम और मुलायम होते हैं, जिसका पात्रा बनाना बहुत उपयुक्त होता है। अरबी का पात्रा मुख्य रूप से मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल में खाया जाता है। कुछ इलाकों में इसे गिरवछ भी कहते हैं। बरसात के समय इसका स्वाद निराला होता है। इसे पकौड़े की तरह तल कर, टिक्की की तरह सेंक कर या सिर्फ उबले हुए रूप में खाया जाता है।

अरबी पात्रा

विधि

अरबी पात्रा बनाने के लिए अरबी के मुलायम पत्ते लें। उन्हें ठीक से धोकर पोंछें और सुखा लें।अब बेसन में अजवाइन, थोड़ा-सा गरम मसाला, नमक, लालमिर्च पाउडर और ढेर सारा अमचूर पाउडर डाल कर गाढ़ा घोल तैयार करें। इसमें अमचूर या खटाई डालना अनिवार्य है, क्योंकि अरबी के पत्तों में पाया जाने वाला रसायन गले में खुजली पैदा करता है, उसे समाप्त करने में खटाई ही मददगार साबित होती है। ध्यान रहे, घोल पकौड़े बनाने वाले घोल की अपेक्षा गाढ़ा हो। घोल पतला होगा, तो पत्तों पर लपेटने से बाहर बहेगा।

अरबी का एक पत्ता फैलाएं और उस पर बेसन के घोल की परत लगाएं। उसके ऊपर दूसरा पत्ता बिछाएं और फिर उस पर भी बेसन की परत चढ़ाएं। इस तरह तीन या चार पत्तों की परत बनाएं और फिर सावधानी से मोड़ते हुए पत्तों को रोल की तरह लपेट लें। इसी तरह सारे पत्तों का रोल बनाएं। अब स्टीमर में पानी गरम करें। भाप उठने लगे तो ट्रे में अरबी पत्तों के रोल को रख कर धीमी आंच पर पंद्रह मिनट के लिए पका लें। अगर आपके पास स्टीमर नहीं है तो फरों की तरह कुकर में भी पका सकते हैं।

फरे पक कर तैयार हो जाएं, तो उन्हें ठंडा होने दें। फिर उन्हें चाकू की मदद से पकौड़ों की शक्ल में गोल-गोल काट लें। इन्हें फ्राइंग पैन में तेल डाल कर दोनों तरफ से पलटते हुए सेंकें या फिर तेल में पकौड़ों की तरह तल लें। इन्हें पकौड़े की तरह भी खा सकते हैं और चाहें तो ग्रेवी तैयार कर सब्जी भी बना सकते हैं। अगर चाहें तो फरों की तरह तड़का लगा कर बिना तले भी का सकते हैं। यानी अरबी पात्रा नाश्ता भी है और तरकारी भी। जैसे पसंद हो खाएं।