मानस मनोहर

स्वादिष्ट भोजन किसे पसंद नहीं आता। पर भोजन का स्वादिष्ट होना ही उसका गुणकारी होना नहीं होता। आयुर्वेद में अक्सर सिर्फ स्वाद के लिए भोजन करने को वर्जित किया गया है। भोजन का सही तरीके से पकाया जाना सेहत के लिए जरूरी है। भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें अतार्किक तरीके से कुछ चीजें, मसाले वगैरह मिलाना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित होता है। इसलिए भोजन पकाते समय यह जरूर जानने का प्रयास करना चाहिए कि किस चीज के साथ किस चीज का मेल सही रहता है और किस चीज से भोजन विषाक्त बन सकता है। इस बार कच्चे पपीते से सामान्य और पारंपरिक व्यंजन बनाते हैं।

कच्चे पपीते की सब्जी

पपीता के गुणों से आप सभी परिचित हैं। यह साल भर और हर कहीं उपलब्ध रहने वाला फल है। गांव हो या शहर, हर जगह यह बहुत आसानी से मिल जाता है। पपीता पका हुआ खाएं या कच्चा, यह सेहत के लिए अत्यंत गुणकारी फल है। कच्चे पपीते की सब्जी, हलवा, मिठाई और चटनी बहुत स्वादिष्ट बनती है। कच्चा पपीता खाने से शरीर में रक्त शर्करा यानी डायबीटिज की समस्या दूर होती है। इससे कब्ज की समस्या से परेशान लोगों को राहत मिलती है। महिलाओं को अक्सर मूत्र संक्रमण हो जाता है, अगर वे नियमित कच्चा पपीता खाएं, तो ऐसे संक्रमण से मुक्ति मिलती है। इसलिए जब आप बाजार जाते हैं और कच्चे पपीते को देखर अनदेखा कर देते हैं कि यह सब्जी के तौर पर अनुपयोगी है, तो ऐसा न करें। हफ्ते में कम से कम एक दिन कच्चे पपीते की सब्जी अवश्य खाएं।

विधि – कच्चे पपीते की सब्जी बनाते समय पारंपरिक तरीका अपनाएं, तो उसके गुण बरकरार रहते हैं। कई लोग पपीते की सब्जी में भी टमाटर-प्याज-लहसुन का पेस्ट वगैरह डाल कर स्वादिष्ट बनाने का प्रयास करते हैं। इस तरह सब्जी स्वादिष्ट तो बन जाती है, पर उसके गुण समाप्त हो जाते हैं, बल्कि वह विषम आहार बन जाता है। आयुर्वेद में विषम आहार स्वास्थ्य के लिए जहर के समान बताया गया है। इसलिए पपीते की सब्जी बनाते समय टमाटर-प्याज जैसी चीजों का इस्तेमाल न करें। पपीते की सब्जी बनाने के लिए उसे ठीक से धोकर छिलका उतार लें। फिर उसके भीतर का बीज वाला हिस्सा भी साफ कर लें। बीज वाले हिस्से की तरफ से भी पतली परत उतार दें, इससे उसकी कड़वाहट खत्म हो जाएगी। अब इसे बड़े टुकड़ों में काट लें।

एक कड़ाही में सरसों का तेल गरम करें और उसमें मेथी दाना, जीरा, राई, थोड़ी सौंफ और जीरे का तड़का लगाएं। अगर आप लाल मिर्च पसंद करते हैं तो तड़के में एक-दो साबुत लाल मिर्च भी डाल दें। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें कटे हुए पपीते को छौंक दें। जरूरत भर का नमक डाल कर ढक्कन लगा दें और थोड़ी देर पकने दें। आंच धीमी रखें। थोड़ी देर बाद ढक्कन खोल कर सब्जी को चला दें। अब उसमें आधा कप पानी डाल दें। पानी ज्यादा न डालें। अगर आपको गाढ़ी ग्रेवी वाली सब्जी पसंद है, तो उसमें एक कटोरी दही फेंट कर डाल सकते हैं। जब भी सब्जी में दही मिलाएं, तो उसे लगातार चलाते रहें, नहीं तो वह फट कर सब्जी को खराब कर देगा। जब सब्जी का पानी लगभग सूख जाए तो ऊपर से धनिया पाउडर, कूटी हुई लाल मिर्च और थोड़ा-सा सब्जी मसाला डाल कर थोड़ी देर और पकने दें। जब पपीता पूरी तरह पक कर नरम हो जाए तो आंच बंद कर दें। ऊपर से हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक का लच्छा डाल कर गरमा गरम परोसें और खाएं।

पपीते की बरफी या हलवा

पीते का हलवा और बरफी बहुत स्वादिष्ट बनती है। इसे बनाना बहुत आसान है और इसे कई दिनों तक रख कर खाया जा सकता है। पपीते की बरफी या हलवा बनाने के लिए पपीते को धोकर छिलका उतार लें और कद्दूकस पर घिस कर लच्छे तैयार कर लें। कई लोग पपीते का हलवा या फिर बरफी बनाने के लिए दूध या खोए का भी इस्तेमाल करते हैं, पर आप बिना दूध और खोए के बनाएं, तो इसके गुण पूरी तरह बरकरार रहते हैं। स्वाद जरूर थोड़ा अलग होगा, पर सेहत की दृष्टि से यह उत्तम होगा। इस हलवे या बरफी में डालने के लिए कुछ छोटी इलायची कूट कर रख लें। जरूरत भर की चीनी पीस लें। अगर चाहें तो कुछ सूखे मेवे भी काट लें।

अब एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच घी गरम करें। उसमें कद्दूकस किए हुए कच्चे पपीते को डाल कर धीमी आंच पर ठीक से चला कर पकने दें। पपीता ज्यादा पानी नहीं छोड़ता, इसलिए अगर आपको आशंका है कि वह कड़ाही के तले में चिपक सकता है, तो बहुत थोड़ा-सा पानी डाल सकते हैं। पांच से दस मिनट पकने दें। अब उसमें चीनी, सूखे मेवे और कुटी हुई इलाइची डाल कर मिलाएं और पकने दें। अगर आपको इसे हलवा की तरह खाना है, तो नरम रख सकते हैं। अगर बरफी बनानी है, तो इसका सारा पानी सूख जाने दें। फिर एक ट्रे या थाली में निकाल कर मोटी परत बनाते हुए दबा कर फैला दें। जब यह ठंडा हो जाए तो बरफी के आकार में काट लें। यह बरफी महीनों खाई जा सकती है, खराब नहीं होगी। अगर आपने इसमें दूध या खोया डाल कर पकाया होगा, तो यह लंबे समय तक नहीं टिकेगा, जल्दी खाकर खत्म करना होगा।