मानस मनोहर

तरबूज की सब्जी : हैरान न हों, तरबूज को आप आमतौर पर फल के रूप में खाते हैं, पर इसकी सब्जी भी बनती है। तरबूज खाने के बाद आमतौर पर लोग इसके छिलके को फेंक देते हैं। पर यह छिलका बहुत गुणकारी होता है। खासकर उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए यह बहुत उपयोगी है। अब से तरबूज खाने के बाद इसके छिलके को फेंकें नहीं। इसकी सब्जी बना सकते हैं, कैंडी, बर्फी और हलवा बना सकते हैं। फिलहाल इसकी सब्जी बनाते हैं, दूसरे पकवानों के बारे में कुछ प्रयोग आप भी सोचिए।

तरबूज का गूदा खाने के बाद इसके छिलके की हरी परत को छील कर उतार लें। अब आपके पास तरबूज का सफेद हिस्सा बच गया। जैसे कद्दू, लौकी, पेठे, हरे पपीते की सब्जी बनती है, उसी तरह तरबूज के छिलके की भी सब्जी बनती है। छिले हुए छिलके यानी तरबूज के सफेद हिस्से के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें।

अब एक कड़ाही में दो चम्मच तेल या घी गरम करें। उसमें जीरे और हींग का तड़का दें और तरबूज के टुकड़ों को छौंक दें। आंच मध्यम रखें। जरूरत भर का नमक और चौथाई चम्मच हल्दी पाउडर डालें और टुकड़ों को एक बार चला कर ढक दें। पांच से सात मिनट पकने दें। फिर ढक्कन खोल कर एक बार और चलाएं। अब इसमें गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर डालें और एक कप पानी डाल कर अच्छी तरह मिला लें। ढक्कन लगा दें और पानी सूखने तक पकने दें। तरबूज के छिलकों को पकने में थोड़ा वक्त लगता है। इन्हें अच्छी तरह नरम होने तक पकाएं। जब ये पक जाएं, तो थोड़ा अमचूर पाउडर और चौथाई चम्मच गरम मसाला और डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। तरबूज की सब्जी तैयार है। यह पारंपरिक तरीका है।

अब अगर आप इसमें कुछ प्रयोग करना चाहते हैं, तो नारियल का चूरा इस्तेमाल कर सकते हैं। जब टुकड़े आधे पक जाएं, तो उसमें आधा कप ताजा घिसा नारियल मिलाएं और साथ ही आधा चम्मच चीनी भी डाल दें। इस तरह यह सब्जी थोड़ी मीठी, थोड़ी चटपटी बनती है। कच्चे नारियल का स्वाद इसे लाजवाब बना देता है। इसी तरह तरबूज के छिलके को घिस कर हलवा बना सकते हैं, खीर भी बना सकते हैं, चाहें तो मावा का उपयोग करते हुए बर्फी भी बना सकते हैं। इस तरह तरबूज फल के साथ-साथ सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल हो जाएगा।

लौकी की खीरगरमी के मौसम में लौकी यानी घीया की सब्जी काफी खाई जाती है। इसकी तासीर ठंडी होती है और कब्ज, गैस, मधुमेह आदि परेशानियों का सामना कर रहे लोगों के लिए यह उत्तम सब्जी मानी जाती है। लौकी को सब्जी के रूप में तो सभी खाते हैं, पर इससे मिष्ठान्न भी बनते हैं, यह शायद कम लोगों को पता हो।

गरमी के मौसम में जब खोये की बिक्री पर प्रतिबंध लग जाता है, तब घीया की बरफी खूब बनती और खाई जाती है। यह खाने में लाजवाब होती है। इसी तरह घीये की खीर बहुत स्वादिष्ट बनती है। इसे बनाना भी बहुत आसान है। इन दिनों जब मिठाइयों की दुकानें प्राय: बंद हैं, मीठा खाने की तलब लगे, तो लौकी की खीर बनाएं और खाएं। गरमी में सेहत की दृष्टि से उत्तम मिष्ठान्न है।
लौकी की खीर बनाने के लिए पतली और नरम लौकी लें। ज्यादा मोटी लौकी में बीज और गूदा अधिक रहने की संभावना होती है। पतली लौकी थोड़ी सख्त होती है, उसमें बीज और गूदा कम होता है। उसका छिलका उतार लें। मोटे कद्दूकस पर घिस लें। फिर एक पैन में एक चम्मच घी पिघलाएं और उसमें घिसी हुई लौकी डाल कर तेज आंच पर चलाते हुए तीन से चार मिनट के लिए भून लें। ध्यान रखें कि लौकी पैन में चिपकने न पाए। बस घी में पक कर थोड़ी मुलायम हो जाए। ऐसा करने से खीर का स्वाद बढ़ जाता है। यों चाहें तो बिना सेंके भी सीधा खीर के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

अब एक कड़ाही में एक लीटर दूध गरम करें। जब दूध पकते हुए आधा रह जाए, तो उसमें दो हरी इलाइची कूट कर या फिर केसर के पांच-छह दाने डाल दें। उसी समय घिसी हुई लौकी डालें और चलाते हुए पकाएं। लौकी को पकने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। बस आप दूध का ध्यान रखें। जब वह अच्छी तरह गाढ़ा हो जाए, तो उसमें जरूरत भर की चीनी डालें और एक उबाल आने के बाद आंच बंद कर दें।

इसमें डालने के लिए कुछ काजू, पिस्ता और बादाम को कतर कर घी में सेंक लें और फिर खीर में डाल कर अच्छी तरह मिला दें। लौकी की खीर तैयार है। इसे परोसने से पहले ठंडा कर लें, तो स्वाद बेहतर आता है। इसे दो-तीन दिन तक भी रख दें, तो खराब नहीं होती।