मानस मनोहर
मटर पराठे
इस मौसम में हरी मटर खूब मिलती है। यह हर किसी को पसंद भी आती है। इसमें भरपूर फाइबर होता है, इसलिए पेट के लिए गुणकारी है। पूरी सर्दी हरी मटर खाएं, खूब खाएं, पर जब मार्च में हवा गरम होने लगे, तो उसके बाद पूरे साल हरी मटर खाना बंद कर देना चाहिए। सर्दी के मौसम में इससे कई व्यंजन बनते हैं। सब्जियों में तो लोग डालते ही हैं, इसकी दाल, घुघनी, पकौड़े, यहां तक कि बरफी और हलवा वगैरह भी बनते हैं। पर हरी मटर के पराठे खाने का मजा ही अलग है। सर्दी में हरी मटर के गरमागरम पराठे का नाश्ता हो जाए तो फिर दिन भर कुछ और खाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। मटर के पराठे बनाना बहुत आसान है। इसके लिए सबसे पहले पराठे के लिए जैसे आटा गूथते हैं, वैसे गूथ कर पंद्रह-बीस मिनट के लिए सेट होने को रख दें। वैसे जब भी पराठे के लिए आटा गूथें, तो रोटी के आटे से थोड़ा भिन्न तरीके से गूथें। इससे पराठे का स्वाद बढ़ जाता है। आटा गूंथते समय आधा से एक कप दूध डालें। इसके अलावा नमक, अजावइन और कलौंजी के कुछ दाने डाल लें और आटा गूथें। आटा नरम रखें।
मटर पराठा बनाने के लिए हमेशा ताजा मटर लें, पैकेट वाले मटर का उपयोग न करें। छिले हुए मटर के दानों को धोकर साफ कर लें। अब एक कड़ाही में एक चम्मच घी गरम करें और जीरा, अजवाइन, हींग का तड़का लगाएं। कुछ लोगों को तड़के का मतलब प्याज-लहसुन-टमाटर होता है, पर जब भी कोई हरी सब्जी बनाएं तो प्याज का उपयोग न ही करें, तो बेहतर। इसलिए इसमें प्याज-लहसुन की जरूरत नहीं होती। तड़का तैयार हो जाए तो मटर को छौंक दें और नमक डाल कर कड़ाही पर ढक्कन लगा दें। आंच धीमी रखें और मटर को नरम होने तक पका लें। फिर इसमें गरम मसाला और कुटी लाल मिर्च डाल कर मिलाएं और थोड़ा ठंडा होने दें। चूंकि मटर में थोड़ी मिठास होती है, इसलिए आप मसाले और मिर्च का अधिक उपयोग कर सकते हैं। इस मटर को किसी बर्तन में डाल कर कुचल लें। इसके गोल दाने कुचलते समय उछलेंगे, इसलिए बेहतर तरीका है कि एक साफ प्लास्टिक की थैली में इन्हें डालें और बेलन से दबा कर मसल लें। अब हरा धनिया, हरी मिर्च और अदरक को महीन काट कर इसमें डालें और अच्छी तरह मिला लें। पराठे की पिट्ठी तैयार है। अब आटे की लोई लेकर हथेली पर कटोरीनुमा आकार दें और उसमें जितना भरा जा सकता हो, मटर की पिट्ठी भरें और सावधानी से बंद कर लें। फिर जिस तरह आलू के पराठे बेलते हैं, सावधानी से हल्के हाथों से इसे बेल लें। ध्यान रखें कि पराठा फटने न पाए। मद्धिम आंच पर देसी घी लगाते हुए पराठे सेंके और हरी चटनी, दही और हरी मिर्च के अचार के साथ गरमागरम परोसें। पूरी सर्दी मटर के पराठे खाएं, सेहत और स्वाद का आनंद लें।
मूंगदाल बथुआ
स मौसम में बथुआ खूब उपलब्ध रहता है। बथुआ अत्यंत गुणकारी साग है। यह रक्त संबंधी अनेक विकारों को दूर करता है। कब्ज दूर करता और पेट संबंधी परेशानियों को नष्ट करता है। इसलिए पूरी सर्दी बथुआ खूब खाएं, हो सके तो रोज खाएं। बथुए से कई तरह के व्यंजन बनते हैं। पराठे, रायता, साग आदि सामान्य व्यंजन हैं। पर मूंगदाल के साथ बथुए का स्वाद लाजवाब होता है। यह दाल और सब्जी दोनों का काम करता है। मूंगदाल बथुआ बनाना बहुत आसान है। इसके लिए धुली या छिलके वाली जो भी दाल उपलब्ध हो उसे एक घंटे पहले धोकर भिगो दें। बथुए के पत्तों को तीन-चार बार धोकर साफ कर लें।
एक कड़ाही में दो-तीन चम्मच देसी घी गरम करें। जीरा-हींग-अजवाइन का तड़का लगाएं और भिगोई हुई मूंगदाल को उसमें डाल दें। साथ ही कटे हुए बथुए के पत्ते डालें और उसमें नमक, हल्दी, कुटी लाल मिर्च और एक चम्मच गरम मसाला डाल कर कड़ाही पर ढक्कन लगा दें। आंच मद्धिम रखें और करीब आधे घंटे तक इसे धीरे-धीरे पकने दें।
नोट: मूंगदाल बनाने के लिए कड़ाही का उपयोग करें, तो अच्छा रहता है। यह दाल चूंकि बहुत कोमल होती है, कुकर में पकाने से यह जल्दी गल कर पानीदार बन जाती है। मूंगदाल का मजा तब है, जब वह गले नहीं, पक कर सिर्फ फट जाए। यह कड़ाही में ही पकाने से संभव हो पाता है।
मूंगदाल बथुआ बनाने के लिए पानी ज्यादा न डालें, इतना ही डालें कि दाल ठीक से पक जाए और गाढ़ी रहे। दाल पककर फट जाए, तो कलछी से चला कर गाढ़ी कर लें और आंच बंद कर दें। अब चाहें तो एक बार और तड़का लगा सकते हैं। इसमें जीरा, साबुत लाल मिर्च और लहसुन का तड़का दे सकते हैं। न भी दें तो पहले ही तड़का लगा चुके हैं उसी से स्वाद आ जाएगा। इसे रोटी या गरमागरम चावल के साथ खाएं, आनंद आएगा।
