साया
साया एक सच है
श्यामवर्णी सच
किसी वस्तु, निर्मिति या फिर
किसी व्यक्ति के होने का,
इसका भी
कि वह रोशनी की जद में है
और वह उस
ज्योति को जज्ब कर पाता है
अपने भीतर,
स्कूल की किताबों में
पढ़ते आए हैं हम सब
रोशनी के रास्ते में
कोई अपारदर्शी माध्यम
आ जाए जब,
तो उसका साया बनता है
सतह पर
…..
सहयोग से चीजें
नई दिशाओं में
बढ़ती हैं
अवरोध से चीजें
नई शक्ल लेती हैं
साया
सिखाता है हमें
साया एक साक्ष्य है
हमारे अस्तित्व का
अस्तित्व के आकार का,
बनते-बिगड़ते
परिवर्तनशील साए
हमारे चलायमान
होने के
समर्थन में खड़े हैं
हम अकेले नहीं हैं
जब तक हमारे पास
हमारा साया है
हम अंधेरे में नहीं हैं।
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नो मैन्स लैंड
थोड़ा कम इंसान होना, शैतान होना है
थोड़ा अधिक इंसान होना, देवता बनना है
शैतान और देवता दोनों हमारे भीतर हैं
एक-दूसरे से अभिन्न और पड़ोसी भी
जैसे हमारे दोनों फेफड़े
हमारे भीतर जीती जागती
एक साबुत दुनिया होती है
जब तब होते रहते हैं जिसके दो फांक
शैतान और देवता बसते हैं जिनमें
अपने पूर्वाग्रहों और
अपनी सहूलियतों के हिसाब से
शैतानों और देवताओं के
इन दो देशों के बीच होता है ‘नो मैन्स लैंड’
जिसकी बंजर जमीन पर
इंसानियत की हरी घासें जहां-तहां उगी होती हैं
कितना सुकूनदेह है
उन हरी घासों के बीच बैठना
मगर कितना जरूरी है इसके लिए
अपनी सीमाओं से
बाहर आना।
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तुम्हारी बतकही
अपने होंठों पर
जब जीभ फिराता हूं
स्वाद आते हैं
तुम्हारी बतकही के
कितना मादक है
तुम्हारे शब्दों को यों
मिसरी की तरह उतारना
अपने भीतर
बरसाती अंधेरी रातों में
जब मैं घूमता हूं
आवारा शहर की
काली चमकती सड़कों पर
ये तुम्हारे ही शब्द हैं
किसी बौद्ध भिक्षुणी के-से
जो बुदबुदाते हैं मेरे होंठों से
विरह और मोहभंग की
लंबी रात को छोटी कर जाते हैं
तुम्हारे अनकहे ये शब्द
उच्चरित होकर अस्फुट
मेरे होठों पर।

