कविता: चिड़िया रानी

जगदीश शर्मा

पंख फैलाए चिड़िया रानी
उड़-उड़ दूर तक जाती है
भर-भर चोंच लाती है
सपने खूब सजाती है।

चीं चीं चूं चूं चीं चीं चूं चूं
खूब मचा है शोर घोंसले में
खुले मुंह आवाज लगाते
मां की राह ताकते बच्चे।

दूर खेत तक उड़ती जाती
यहां वहां से दाने चुनती
चीं चीं चूं चूं चीं चीं चूं चूं
मचे शोर में जल्दी आती।

बरसे मेघ या तपे सूरज
कभी न थकती चिड़िया रानी
आती-जाती भर चोंच है लाती
क्या क्या लाती चिड़िया रानी।

छोटी सी दुनिया चिड़िया तेरी
खूब सजाती मेहनत से इसको
दिन भर चैन नहीं है तुमको
पर बड़े सुकून की दुनिया तेरी।
शब्द-भेद: कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

निर्माण / निर्वाण
निर्माण का अर्थ है रचना या बनाना। गढ़ या ढाल कर कोई नई चीज तैयार की जाती है, तो उसे निर्माण कहते हैं। निर्वाण का अर्थ मुक्ति या मोक्ष से होता है। यह मृत्यु से परे की अवस्था है। निर्वाण प्राप्त करने वाला व्यक्ति जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पा जाता है।

बेर / बैर
बेर सर्दी के मौसम में मिलने वाला एक फल है, जो स्वाद में खट्टा-मीठा होता है। वहीं बैर का अर्थ किसी से दुश्मनी मोल लेना या शत्रुता करना है। बैर बदला लेने की भावना को भी कहते हैं।