नागेश पांडेय ‘संजय’
कविता: अहा! दोस्ती जिंदाबादअहा! दोस्ती जिंदाबाद।
मिलजुल कर जो रहते,
सबसे ही करते हैं प्यार।
उनको दोस्त बनाने को,
सब रहते हैं तैयार।
मेलजोल है इसकी खाद,
अहा! दोस्ती जिंदाबाद।
नहीं दोस्ती में होता है,
जाति-पांति या धर्म।
आपस में दिल मिल जाते हैं,
यही अनूठा मर्म।
रहता साथ सदा आबाद,
अहा! दोस्ती जिंदाबाद।
छोटा-बड़ा न ऊंचा-नीचा,
सब हैं एक समान।
सच्चे दोस्त सदा करते हैं
सबका ही सम्मान।
बात सदा यह रखना याद,
अहा! दोस्ती जिंदाबाद। ०
शब्द-भेद: कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
आसन / आसन्न: बैठने की वस्तु जैसे कुर्सी, चौकी आदि को आसन कहते हैं। आसन का एक अर्थ बैठने के ढंग, तरीके से भी है। जैसे योगासन। जबकि आसन्न का मतलब होता है निकट आया हुआ, समीपस्थ। जैसे परीक्षा आसन्न है।
अगम / आगम: ऐसा स्थान जहां तक पहुंचना मुश्किल हो, दुर्गम को अगम कहते हैं। जिसकी थाह न लगे, यानी अथाह के लिए भी अगम शब्द का प्रयोग होता है। जबकि आगम का अर्थ है आने वाला, भविष्यत काल। वेद-शास्त्रों को भी आगम कहते हैं।
