रेनू दत्त
हमारी पंरपरा में शान और मान का बड़ा महत्त्व है। मान से ही सम्मान मिलता है। और इस मान-सम्मान के रूप में कई प्रतीक गढ़े गए हैं। महिलाओं का सिर पर पल्ला रखना या पुरुषों में पगड़ी बांधने की परंपरा इसी वजह से बनी है। पगड़ी पुरुषों के माथे पर बांधे जाने वाले शान का प्रतीक होती है। आज भी राजपूतों और राजघरानों में पुरुषों के पगड़ी बांधने का रिवाज है। मगर अब पगड़ी महज रिवाज या परंपरा का हिस्सा न रह कर फैशन में शामिल हो गई। इस बदलते वक्त में पगड़ी ने भी पाग, साफा, फालिया, घुमालो, अमलो आदि के रूप में अपने कई कलेवर बदले। पगड़ी के इन बदलते कलेवरों के साथ ही इसने अपना अस्तित्व नहीं खोया। पगड़ी हमारी संस्कृति में खास पहचान रखती है। भारत के हर राज्य में पगड़ी पहनने का अपना ढंग है, जिससे वे भीड़ में भी अलग दिखाई देते हैं। वैसे शादी ब्याह जैसे पारंपरिक समारोह में भी पगड़ी पहनी जाती है, लेकिन इस आधुनिक जमाने में अब रुतबे और शान के साथ-साथ इसे फैशन से जोड़ कर भी देखा जाता है।
इन दिनों शादी-ब्याह और अन्य मौकों पर अलग-अलग रंग, थीम और प्रिंट की पगड़ी ज्यादा पसंद की जा रही है। शेरवानी और धोती-कुर्ता के साथ अगर मैचिंग पगड़ी बांधी हो तो यह राजसी आभा का परिचय देती है और समारोह में आए हर अतिथि का ध्यान आकर्षित करती है। शादी समारोह के अलावा आप इसे किसी भी समारोह में पहन सकते हैं। ई प्रमुख तीज-त्योहारों और शादियों आदि के अवसरों पर पुरुषों द्वारा पगड़ी पहनी जाती है। यहां तक कि हिंदुओं में विवाह में दूल्हे को रेडिमेड साफा या पगड़ी पहनाना अनिवार्य माना जाता है। हमारे यहां कई शुभ अवसरों पर सगे-संबंधियों और मेहमानों को पगड़ी पहना कर उनका अभिनंदन किया जाता है। आजकल पगड़ी और साफे के अलग-अलग प्रकार के मटीरियल बाजार में उपलब्ध हैं, जिनमें सूती, सिल्क और नेट आदि मटीरियल प्रमुख हैं। साफा बांधने की झंझट से बचने के लिए बाजार में उपलब्ध रेडीमेड साफे और पगड़ी एक बेहतर विकल्प हैं, जिनमें आपको हेवी वर्क वाले साफे और पगड़ी मिल जाएंगे।
राजस्थानी पगड़ी : राजस्थान में पगड़ी को खास अहमियत दी जाती है। शादी के मौकों पर दूल्हे के अलावा रिश्तेदार भी पगड़ी पहनते हैं। मारवाड़ी पगड़ी में रेड बंधेज फैब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसे रॉयल लुक देने के लिए ब्रांच भी लगाया जाता है। पंजाब में पगड़ी का चलन तो आम है, पर राजस्थानी पगड़ी दुनिया भर में मशहूर है। कई फिल्मों में अभिनेताओं ने राजस्थानी पगड़ी पहन कर युवाओं का मन लुभाया है।
गुजराती पगड़ी : चंदेरी फैब्रिक में गुजराती स्टाइल पगड़ी बहुत अच्छी लगती है। यह कॉटन या वैलवेट फैब्रिक में भी अच्छी लगती है।
मराठी पगड़ी : मराठी स्टाइल पगड़ी में ज्यादातर गुलाबी और केसरी रंग का इस्तेमाल किया जाता है। यह पहनने में हलकी होती है इसलिए इसे पहनना आसान है। इस पर अपनी पसंद के हिसाब से स्वारोवस्की स्टोन भी लगवा सकते हैं। इससे पगड़ी को रॉयल लुक मिल जाएगी।
पंजाबी स्टाइल पगड़ी : पंजाब में शादी के मौके पर दूल्हा और उसके रिश्तेदार पगड़ी पहनते हैं। शादी के मौके पर आप भी शेरवानी के साथ पंजाबी स्टाइल पगड़ी बांध सकते हैं। इसे और ग्रेसफुल दिखाने के लिए स्टोन, ब्रांच या कलगी लगा सकते हैं।
बनारसी पगड़ी : बनारसी स्टाइल फैब्रिक का फैशन हमेशा चलन में रहता है। शादी में बनारसी पगड़ी से आप शाही अंदाज पा सकते हैं। आप हैवी इंब्रायडरी शेरवानी के साथ बनारसी प्रिंट स्टाइल भी पहन सकते हैं।
फूलों वाली पगड़ी : सादा शेरवानी के साथ आजकल फूलों के प्रिंट वाली पगड़ी लड़के खूब पसंद कर रहे हैं। इससे लड़कों का व्यक्तित्व अलग ही नजर आता है उनको देख कर लगता है कि वे जल्दबाजी में नहीं हैं और पार्टी का लुत्फ लेने आए हैं। युवाओं को इस तरह के नए-नए डिजाइन की पगड़ी आकर्षित करती है। मौसम के हिसाब से भी पगड़ी के रंग और डिजाइन बदल जाते हैं। आरगेंजा पगड़ी : यह पगड़ी देखने में ही काफी आरामदेह लगती है। आरगेंजा आरकंडी की तरह का ही कपड़ा होता है। इस कपड़े से बनी पगड़ी एक जगह पर टिकी रहती है। अगर आप किसी पार्टी में इसे पहन कर जा रहे हैं तो इसमें ब्रांच और कलगी लगाएं। देखने में यह बहुत अच्छा लगता है।
पगड़ी बांधना हर किसी के वश की बात नहीं है। पूरी नजाकत के साथ इसकी एक-एक लटकन को गोल-गोल घुमा कर माथे पर बांधा जाता है। इसकी एक भी लट ढीली होने पर पगड़ी खुल सकती है। राजघरानों में तो एक अलग व्यक्ति नियुक्त किया जाता था, जो केवल पगड़ी बांधने का कार्य करता था।
दुनिया भर को राजस्थानी संस्कृति से परिचित कराने के लिए कई बड़े और नामी होटलों में शेफ, होटल मैनेजर आदि सभी का ड्रेस कोड धोती-कुर्ता और पगड़ी है। बदलते मौसम के साथ-साथ पगड़ी के रंगों में भी आपको भिन्नता देखने को मिलेगी।राजस्थान और गुजरात में हर तीज-त्योहार पर अलग-अलग प्रकार की पगड़ी पहनी जाती है। इनमें से सिर्फ लहरिया पगड़ी ऐसी पगड़ी है, जो सदाबहार है। पगड़ी ने समय के हिसाब से अपने रंग, डिजाइन और पहनने के स्टाइल में बहुत सारे प्रयोगों और विकल्पों को चुना है।
भारतीय संस्कृति की प्रतीक पगड़ी अब रैंप पर भी अपने जलवे बिखेरने लगी है। आजकल कई बड़े फैशन डिजाइनर पुरुषों के कलेक्शन में पगड़ी के साथ नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। लड़कियों को स्कार्फ बांधे देखना तो आम बात है, पर अब वे अलग-अलग ढंग से पगड़ी बांधे भी देखी जाने लगी हैं। फैशन डिजाइनर लड़कियों के लिए पगड़ी के साथ पहने जाने वाले अलग-अलग परिधान डिजाइन कर रहे हैं। दरअसल, जिस देश का जो पहनावा होता है वही समय के साथ फैशन के रूप में उभरता है। कौन सा ट्रेंड उभर कर आएगा यह सब युवाओं की पसंद पर निर्भर करता है। फिर भी अगर खास लोग इसे तरजीह देते हैं तो आम लोग भी इसे पहनने लगते हैं। पहले प्रधानमंत्री की पसंद के कुर्ते ने अपना रंग जमाया तो अब फैशन में उनकी पगड़ी भी है। पगड़ी अब सम्मान स्वरूप एक सुंदर उपहार में तब्दील हो गई है। ’
भारत में पगड़ी की परंपरा बहुत पुरानी है। अलग-अलग प्रांतों के लोग अलग-अलग ढंग से पगड़ी पहनते हैं। पगड़ी बांधने के तरीके से पहचाना जा सकता है कि पगड़ी पहनने वाला व्यक्ति किस प्रांत या इलाके का है। कहीं पगड़ी आस्था से जुड़ी है तो कहीं मान-सम्मान से। पगड़ी बांधना भी एक कला है और कई जगह इसे पहनने का कौशल सिखाने के लिए प्रशिक्षण केंद्र तक खुले हैं। अब पगड़ी फैशन में है। लड़कों के अलावा लड़कियां भी पगड़ी पहने देखी जाने लगी हैं। अलग-अलग परिधान के मुताबिक पगड़ियां बनाई और पहनी जाने लगी हैं। पगड़ी की परंपरा और फैशन में इसके चलन के बारे में बता रही हैं रेनु दत्त।

