इस तरह के हादसों के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है। जहां सड़क परिवहन का हाल बुरा है, वहीं सड़कें बदहाल हैं, यातायात के नियम पूरी तरह लागू नहीं होते। साथ ही ट्रक ड्राइवरों को प्रशिक्षण देने की उचित व्यवस्था नहीं है। अपनी लंबी यात्रा में लगातार जागते रहने की वजह से भी वे अक्सर अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं कर पाते और कभी नींद और कभी हड़बड़ी में हादसों के शिकार हो जाते हैं। वहीं देश में आज भी ज्यादातर लोग यातायात नियमों से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं या इस ओर जागरूकता कम ही दिखाते हैं। जहां सड़कों के गड्ढे हादसों की वजह बनते हैं, वहीं चिकनी, सपाट सड़कों पर युवा तेज रफ्तार का जोश दिखाते दिख जाते हैं और निडरता से स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, संगीत सुनते हैं। इससे भी सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है। यही वजह है कि सड़क हादसों में मरने वालों में अठारह से पैंतीस वर्ष के लोगों की संख्या अधिक है। ऐसे में जब तक तेज रफ्तार पर अंकुश लगाने के साथ ही शराब पीकर गाड़ी चलाने पर रोक नहीं लगाई जाएगी, तब तक इन हादसों में कमी लाना संभव नहीं हो सकता।
सख्त नियमों की दरकार
बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए सरकार ने इस पर मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक में यातायात नियमों के उल्लंघन पर दस गुना तक जुर्माने और सजा का प्रावधान किया गया है। साथ ही यातायात नियमों को कड़ा किया जा रहा है। इन नियमों के मद्देनजर कुछ बंदिशें भी लगाई जा रही हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें। वहीं राज्यों की ओर से भी अब कड़े यातायात नियम लागू किए जा रहे हैं। जैसे हाल में मध्यप्रदेश में अब नए दो पहिया वाहनों को खरीदने वालों के लिए भी नए नियम बनाए गए हैं।
अब कोई वाहन खरीदने से पहले उन्हें दो हेलमेट खरीदने होंगे, इसके बाद ही वे अपनी बाइक या स्कूटर का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार भी यह नियम लागू सख्ती से लागू करने जा रही है कि हेलमेट पहने बाइक सवारों को ही पेट्रोल पंपों से पेट्रोल मिलेगा। साथ ही अब यातायात पुलिस नए नियमों को भी लागू कर रही है। इसके तहत अब ऐसे बाइक सवारों की खैर नहीं, जो वाहन चलाते समय संगीत का भी लुत्फ उठाते हैं। अगर वे वाहन चलाते समय हेडफोन पर संगीत सुनते पकड़े जाते हैं, तो उन्हें एक हजार रुपए तक का जुर्माना देना होगा। इसके लिए सीसीटीवी के जरिए वाहन चालकों पर नजर रखी जाएगी, ताकि उन्हें ई-चालान भेजा जा सके।
इन हादसों के बाद होने वाली पीड़ित परिवारों को होने वाली समस्याएं भी कम नहीं हैं। इनमें ऐसे परिवारों की संख्या भी कम नहीं होती, जिन्हें पात्र होने के बावजूद मुआवजा नहीं मिल पाता। कुछ समय पहले सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क हादसों की वजह से बर्बाद होने वाले परिवारों को मुआवजा नहीं दिए जाने पर नाराजगी जताई थी। 2014-15 में बीमा कंपनियों ने करीब 11,480 करोड़ का मुआवजा दिया।
हालांकि आधे पीड़ित इससे वंचित रह गए। एक अध्ययन के मुताबिक भारत में सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल हुए पीड़ितों को औसतन पांच लाख रुपए का खर्च कर अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता है। इससे पूरा परिवार प्रभावित होता है। वहीं देश को इन सड़क हादसों की वजह से मानव संसाधन के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
ऐसे में यह चिंता का विषय है कि इतने अधिक सड़क हादसों और इनमें हुई मौतों का मुद्दा लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण नहीं लगता और इसके बावजूद लोग जागरूक क्यों नहीं होते? क्यों यातायात नियमों की अनदेखी लगातार की जाती है और वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल कर लोग अपनी जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आते।
राज्य 2015 2016 2017
उत्तर प्रदेश 17,666 19,320 20,124
तमिलनाडु 15,642 17, 218 16, 157
महाराष्ट्र 13,212 12,935 12,264
कर्नाटक 10,856 11,133 10,609
राजस्थान 10,510 10,465 10,444
मध्यप्रदेश 9,314 9,646 10,177
आंध्रप्रदेश 8,297 8,541 8,060
तेलंगाना 7,110 7,219 6,596
पश्चिम बंगाल 6,234 6,544 5,769
बिहार 5,421 4,901 5,554
