कविता
बरसात का मौसम/ संतोष उत्सुक
पानी बरसता छम छम छम
आया है बरसात का मौसम
घुमड़ते रुकते कभी बरसते
नीले सफेद बादलों का संगम
मच्छर कीट पतंगे भी आए
मेढक करते टर टर हरदम
छतरी टोपी और बरसाती
पड़ने लगी हैं आजकल कम
हरी भरी हो गई है धरती
सब हो रहा गीला और नम
बारिश न हो तो, होते तंग
पानी पानी करते रहते हम।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
प्रसाद / प्रासाद
खाने की वह वस्तु, जो देवता या देवी को चढ़ाई गई है, प्रसाद कहलाती है। प्रसाद का अर्थ अनुग्रह, कृपा, प्रसन्नता भी होता है। जबकि प्रासाद का अर्थ बहुत बड़ा भवन, महल, राजभवन होता है। आमतौर पर राजा के महल को प्रासाद कहते हैं।
गणना / गड़ना / गढ़ना
संख्या जानने के लिए जब वस्तुओं को गिनते हैं, तो उसे गणना कहते हैं। गणना का अर्थ होता है गिनना। जबकि गड़ना का अर्थ है चुभना, धंसना, दर्द करना, दुखना। और जब किसी चीज को काट-छांट कर ठीक किया जाता है, तो उसे गढ़ना कहते हैं।


