कविता

थैला लेकर
भागा भालू

चला घूमने बंदर छैला,
मिला राह में उसको थैला।
थैले में थी भरी दवाई,
बना डॉक्टर बंदर भाई।

इक दिन की हम बात बताएं,
बंदर की करतूत सुनाएं।
सुबह सवेरे आया भालू,
लगता था घबराया भालू।

भेद बात का उसने खोला,
बंदर से हकलाते बोला।
वन में संकट आन पड़ा है,
शेर हुआ बीमार बड़ा है।
बंदर बोला जाओ चाचा,
फीस हमारी लाओ चाचा।
शेर हुआ जो रब को प्यारा,
पैसा सब जाएगा मारा।

भालू बोला, रब से डरना,
इक दिन है सबको ही मरना।
बंदर बोला सिर मत खाओ,
जेब गरम है तो बतलाओ।

लगा नींद से जागा भालू,
थैला लेकर भागा भालू।

शब्द-भेद

कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

बोना / बौना

जब कोई फसल या पेड़-पौधा उगाने के लिए बीज को मिट्टी के अंदर बोया जाता है तो उस प्रक्रिया को बोना कहते हैं, जबकि जब किसी व्यक्ति की लंबाई सामान्य से काफी छोटी होती है तो उसे बौना कहते हैं।

लोटा / लौटा

पानी रखने और पीने के गोल आकार के बरतन को लोटा कहते हैं। घरों में कलश के रूप में अक्सर लोटे का उपयोग आपने देखा होगा। जबकि जब कोई व्यक्ति कहीं से जाकर वापस आता है तो उसे लौटा कहते हैं। वह कल घर लौटा।