दिविक रमेश
पेड़ बताओ
टहनी पर से
तोड़ तोड़ जब
लेता आम!
अच्छा लगता
बुरा-बुरा या
मुंह बन जाता
बोलो आम!
लगा कि हंस कर
कहा आम ने
चलो बताऊं
लाओ कान!
प्यारे बच्चे
अच्छा लगता
खुशी-खुशी जब
लेते आम!
लेकिन रोता
तहस-नहस कर
कोई लेता
जब-जब आम!
पत्थर से जो
घायल करते
मेरा दुख वे
कब समझते।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
नजरा / नजारा
ऐसा व्यक्ति जो देखते ही पहचान लेता है कि कोई वस्तु अच्छी, बुरी, महंगी या सस्ती है, उसे नजरा कहते हैं। जबकि सुंदर दृश्य, ऐसा दृश्य, जिसे देखने से मन को अच्छा लगता है, उसे नजारा कहते हैं।
नगला / नजला
छोटी बस्ती, गांव, कस्बे को नगला कहते हैं। गांवों या स्थानों के नामों के आगे नगला शब्द जुड़ा हो, तो समझिए कि वह मुख्य गांव या स्थान का छोटा हिस्सा है- जैसे नगला मुबारकपुर। जबकि जुकाम, सर्दी को नजला कहते हैं।

