कविता: मियां मटक्कू
डॉ घमंडीलाल अग्रवाल
मियां मटक्कू
लेकर लट्टू
खेले बारह मास,
पढ़ने को तो
खा किए वो
कोरी-सी बकवास।
ता-ता थैया
करता भैया
इम्तिहान फिर आया,
एक महीने
बाद सभी ने
अंक-पत्र भी पाया।

देख नतीजा
हृदय पसीजा
नंबर आए जीरो,
निकली सारी
दुनियादारी
बड़े बने थे हीरो।
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
घाट/घात: छठ पूजा पर यमुना के किनारे घाट सजाए जाते हैं। जबकि जब किसी शिकारी को किसी का शिकार करना होता है तब वह घात लगाकर उसे मारता है।
कल/काल: कल से अभिप्राय आने वाला दिन है। जैसे कल सोमवार है या मंगलवार है। और काल का एक अर्थ तो भाषा व्याकरण में भूत, भविष्य और वर्तमान काल से है तो दूसरा किसी के आने वाले अंत समय को भी काल कहते हैं।

