रेनू सैनी

नील सरोवर नीलाभ प्रदेश का सबसे खूबसूरत सरोवर था। यहां की प्राकृतिक छटा देखते ही बनती थी। नीलाभ प्रदेश में सब ओर हरियाली छाई हुई थी। हरे-हरे पत्ते, रंग-बिरंगे फल-फूल, छोटे-छोटे पहाड़ों को देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि मानो प्रकृति के स्वर्ग में आ गए हों। सुबह-सुबह जब सूरज की किरणें पहाड़ों से निकलतीं तो सिंदूरी सूरज पूरे नीलाभ प्रदेश को अपनी किरणों से चमका देता। सूरज की किरणें नीले नील सरोवर पर पड़तीं तो देखनेवाले को ऐसा लगता मानो चांदी व नीलम की चादर बिछी हुई हो। नील सरोवर मछलियों का था। यहां पर छोटी-बड़ी, काली-गोरी, दुबली-मोटी हर तरह की रंग-बिरंगी मछलियां थीं। इन खूबसूरत मछलियों के कारण ही नील सरोवर सबके आकर्षण का केंद्र था।

नील सरोवर की रानी नीलू मछली थी। वह बहुत ही खूबसूरत थी। उसका आधा शरीर मानव का व आधा मछली का था। उसे यह शक्ति भी प्राप्त थी कि समय पड़ने पर वह पूरी मछली व पूरा मानव बन सकती थी। नील सरोवर पर नीलू का ही शासन था। नील सरोवर में सभी मछलियां नीलू का कहना मानती थीं और आपस में बड़े प्रेम से रहती थीं। उन्हें यह तो पता ही न था कि झगड़ा क्या होता है? एक दिन नीलू के पास संदेश आया कि झीन सरोवर में सर्वश्रेष्ठ मत्स्य सुंदरी प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है और जिस भी सरोवर की मछली इस प्रतियोगिता में जीतेगी उसे व उसके सरोवर को हर तरह की सुविधाएं प्रदान की जांएगी। नियत दिन पर सभी मछलियों ने नीलू को शुभकामनाएं देकर झीन सरोवर की ओर विदा किया। नीलू युवती में परिवर्तित होकर नील सरोवर से निकल कर झीन सरोवर की ओर चल पड़ी। धरती पर उसने अनेक मनुष्य देखे। छोटे-बड़े, मोटे-पतले, लंबे-काले। नीलू ने यह भी देखा कि अधिकतर मनुष्य छोटी-छोटी बात पर लड़ते तो हैं ही, यहां तक कि अपने स्वार्थ और काम को पूरा करने के लिए एक-दूसरे को जान से मारने से भी नहीं हिचकते। मनुष्यों को उनके नाम के आधार पर बाद में, जाति के नाम पर पहले जाना जाता है। यहां तक कि आधुनिक कहे जाने वाले राज्यों में लड़के-लड़की में भेदभाव किया जाता है।

कन्या भ्रूण को गर्भ में ही खत्म कर दिया जाता है। धरती पर मनुष्यों में आपस में इतना अत्याचार करते देख नीलू की आंखों में आंसू भर आए। इन्हीं सब अनुभवों को प्राप्त करती नीलू झीन सरोवर के प्रतियोगिता स्थल पर पहुंची। प्रतियोगिता स्थल पर पूरे विश्व की खूबसूरत व प्यारी मछलियां भाग लेने के लिए आई हुई थीं। प्रतियोगिता के पांच राउंड थे-खूबसूरत ड्रेस राउंड, तैराकी राउंड, कलाबाजी राउंड, व्यक्तित्व राउंड व निर्णायक राउंड। खूबसूरत ड्रेस राउंड में नीलू ने नीले सितारों से झिलमिलाती साड़ी बड़े ही कलात्मक और आकर्षक तरीके से पहनी हुई थी। नीलू की झिलमिलाती सितारों वाली साड़ी में सभी अपनी सुधबुध खो बैठे। इसमें नीलू ने बाजी मारी। दूसरे राउंड में मीना नामक मछली ने बाजी मारी। कलाबाजी राउंड में सभी ने विभिन्न तरह की कलाबाजियां दिखार्इं। व्यक्तित्व राउंड भी नीलू के नाम रहा। अंतिम निर्णायक राउंड में सभी से यह प्रश्न पूछा गया कि मछलियों का संसार मनुष्यों से भिन्न व अच्छा कैसे है?

जवाब सभी ने अपने अनुसार दिया। चीनू मछली बोली, ‘हम पानी में रहते हैं। इसलिए हमारा जीवन मनुष्यों से भिन्न व अच्छा है।’ मीना मछली ने जवाब दिया,ह्यह्णपानी में ही हमारा जीवन है जबकि मनुष्य पानी में नहीं रहता और हमारी अपनी अलग दुनिया है जो हमें मनुष्यों से विभिन्न करार देती है । हो सकता है मनुष्यों को अपना जीवन सर्वश्रेष्ठ लगता हो किंतु जीव होने के नाते हमें तो अपना ही संसार मनुष्यों से अच्छा प्रतीत होता है ह्यह्ण निर्णायक मीना के जवाब से संतुष्ट नजर आए । इस प्रकार सभी मछलियों ने अपने-अपने अनुसार जवाब दिए।

नीलू अपने जवाब में बोली,ह्यह्णहम जल की रानी हैं और जीवन ही हमारा पानी है । इसलिए हम मनुष्यों से भिन्न हैं । हमारा जीवन मनुष्यों से अच्छा इसलिए है क्योंकि मानव जैसी सर्वश्रेष्ठ योनि पाने पर भी हर मानव लड़ाई-झगड़े में लगा है, अपने स्वार्थ को पूरा करने की खातिर वह निर्दोष व्यक्ति को भी जान से मारने से नहीं चूकता। मैंने यहां आते समय देखा कि सिर्फ लूटपाट के लिए भी लोग एक-दूसरे की कीमती जान ले लेते हैं। दूसरे हमारे यहां सब की पहचान पहले नाम से होती है जबकि मनुष्यों के यहां नाम से पहले उनकी जाति पर ध्यान दिया जाता है कि वह उच्च जाति का है या निम्न जाति का। वहां निम्न जाति को उच्च जाति के अधिकतर लोग हेय दृष्टि से देखते हैं और तो और, यहां पर प्रकृति तक के साथ खिलवाड़ कर औरत के गर्भ में ही मादा भ्रूण को नष्ट कर दिया जाता है जिससे कि लड़की जन्म ही न ले पाए। हमारे यहां नर व मादा में कोई भेद नहीं किया जाता। सबके साथ समान व्यवहार होता है। इन सब बातों पर गौर किया जाए तो निश्चय ही हमारा जीवन मनुष्यों से श्रेष्ठ ही नहीं अपितु सर्वश्रेष्ठ है । आप ही बताइए वह मनुष्य समाज जो इतनी छोटी सी बात नहीं समझता कि मादा भू्रण को नष्ट कर वह प्रकृति में असंतुलन पैदा कर रहा है, वह खुद को सर्वश्रेष्ठ समझने की भूल कैसे कर सकता है? जहां इक्कीसवीं सदी में नारी ने अपने संघर्ष और मेहनत से जग पर अपनी पहचान कायम की है, वहीं आज गर्भ में उसके अस्तित्व को ही मिटाया जा रहा है।

उसका जवाब सुनकर एक निर्णायक बोला, ‘मादा भू्रण को नष्ट न किया जाए, इसके लिए आप क्या सुझाव देना चाहेंगी?’ इस पर नीलू बोली, ‘ मैंने अभी से यह प्रण कर लिया है कि मैं आज से मानवों के बीच में ही रह कर इस भ्रांति को दूर करने की कोशिश करूंगी कि मादा भ्रूण को नष्ट न किया जाए और जन-जन को यह बताने का प्रयास करूंगी कि मादा भ्रूण ही भविष्य की एक मां है और मां का कत्ल तो ईश्वर भी माफ नहीं कर सकता। इसलिए तुरंत ही इस पर रोक लगे और मादा भू्रण को गर्भ में विकसित होने के बाद इस संसार में आंखें खोलने पर पूर्ण रूप से खिलने का अवसर मिले।’ यह बोलने के बाद नीलू की आंखों में आंसू भर आए। नीलू को सर्वसम्मति से सर्वश्रेष्ठ मत्स्य सुंंदरी चुन लिया गया। इसके बाद निर्णायकों ने उसे मानव रूप धारण कर अपने प्रण को पूरा करने के लिए मुक्त कर दिया।