कुमार गौरव अजीतेंदु
बंदर आया
मेरे घर में बंदर आया
उसे देखकर मैं घबराया
डंडा एक दिखाकर उसको
छत के रस्ते दौड़ भगाया
अनुभव तभी किया कुछ मैंने
बंदर का चेहरा उदास था
मेरे घर से निकल गया पर
बैठा अब भी वहीं पास था
पछता के अपनी करनी पर
मैंने उसको पुन: बुलाया
पूछा, भाई क्या दुख तुमको?
कैसा संकट तुम पर आया?
बंदर भरे गले से बोला
मैं इंसानों का मारा हूं
मेरा घर तोड़ा उन सब ने
अब मैं फिरता बंजारा हूं
इतना कह कर निकल गया वह
दिल कचोटने लगा हमारा
मानव होते हैं क्यों ऐसे!
नोच गए क्यों जंगल सारा? ०
शब्द-भेद
कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।
दांव / दाव
कुश्ती या शतरंज के खेल में प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ने के लिए आजमाई जाने वाली चाल दांव कहलाती है। जबकि दाव एक प्रकार का लकड़ी आदि काटने का तलवार जैसा हथियार होता है। इसे दाब भी कहते हैं।
सदा / सादा
हमेशा शब्द का पर्याय है सदा। सदा सत्य बोलो, सदा सुहागन रहो जैसे वाक्य आप अक्सर सुनते होंगे। जबकि सादा का अर्थ होता है सफेद। बिल्कुल सामान्य, बिना सजावट के या ऐसी चीजों को भी सादा कहते हैं, जिन्हें कृत्रिम चीजों से सुंदर बनाने की कोशिश न की गई हो।

