जियाउर रहमान जाफरी

कविता: पेड़ लगाया

क्या शायु ने शौक दिखाया
घर में आकर पेड़ लगाया

हरी भरी ये डाली उसकी
वो करता रखवाली उसकी

वक़्त से पानी भी देता है
खाद भी आकर ले लेता है

घेर के ईंटे से वो आये
कहीं ना बकरी ये खा जाये

खुशियाँ कितनी वो पाता है
रोज पेड़ जो बढ़ जाता है

कुछ दिन में बस अब ये होंगे
उसमें फल और फूल लगेंगे

छाँव भी इससे मिल जायेगी
ठंड हवाएं भी आयेगी

कभी दरख़्त न वो काटेगा
सब फल आपस में बांटेगा

शब्द-भेद: कुछ शब्द एक जैसे लगते हैं। इस तरह उन्हें लिखने में अक्सर गड़बड़ी हो जाती है। इससे बचने के लिए आइए उनके अर्थ जानते हुए उनका अंतर समझते हैं।

ग्रह / गृह: ग्रह का अर्थ है सौरमंडल के सदस्य। जैसे पृथ्वी एक ग्रह है। वहीं गृह का अर्थ है घर या मकान। जहां हम सभी रहते हैं।

आदि/ आदी : आदि का अर्थ होता है आरम्भ या प्राचीन। ऐसे समझें-आदि काल में गंगा बहुत साफ हुआ करती थी। जबकि आदी का अर्थ होता है अभ्यस्त। किसी चीज या आदत का अभ्यस्त हो जाना ही आदी है।