आजकल सेहत को लेकर सतर्क रहने वाले लोग ऐसे व्यंजनों की तलाश में रहते हैं, जिन्हें खाने से ऊर्जा तो भरपूर मिले, पर उनमें तेल और मसालों का इस्तेमाल कम से कम होता हो। ऐसे व्यंजन हर इलाके में बनते हैं। पर आमतौर पर लोग अपने इलाके के प्रचलित व्यंजनों को बनाने और खाने के अभ्यस्त होते हैं, इसलिए बार-बार उन्हें ही बनाते हैं। इस तरह एक ही चीज बार-बार खाने से ऊब होने लगती है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि दूसरे इलाकों में बनने वाले व्यंजनों के बारे में भी जानें और उनसे मिलते-जुलते अपने इलाके के व्यंजनों के साथ उनका तालमेल बिठा कर पकाएं और नया स्वाद पाएं। आइए, कुछ ऐसे ही व्यंजन बनाएं।
दाल ढोकली मुख्य रूप से गुजरात में खाया जाने वाला व्यंजन है। पर इससे मिलता-जुलता व्यंजन उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी बनाया और खाया जाता है। दाल-पिट्ठी। इसके बारे में हम पहले बात कर चुके हैं। दाल पिट्ठी और ढोकली पकाने का तरीका लगभग समान है। दाल ढोकली अपने आप में संपूर्ण आहार है। अगर इसे रोटी के साथ खाना चाहें तो उस रूप में भी उपयोग कर सकते हैं।
दाल ढोकली बनाना बहुत आसान है। इसके लिए अरहर यानी तुअर की दाल, थोड़ी-सी मूंगफली, आटा, बेसन, नमक, चीनी और कुछ खड़े और पिसे मसालों की जरूरत होती है।
आधा कप अरहर की दाल को धोकर कुछ देर के लिए भिगो दें। फिर एक बड़े कुकर में तीन-चार कप पानी और भिगोई हुई दाल डालें। उसमें थोड़ा-सा हल्दी पाउडर, थोड़ा-सा हींग और नमक डालें। अब एक कटोरी में दो चम्मच मूंगफली के साबुत दाने लें और कुकर में दाल के ऊपर रख दें। कुकर का ढक्कन लगा कर धीमी आंच पर दाल को दो से तीन सीटी तक पकने दें।
इस बीच आधा कप गेहूं का आटा लें, उसमें दो चम्मच बेसन मिलाएं और ऊपर से थोड़ा-सा हल्दी पाउडर, नमक, एक छोटा चम्मच अजवाइन और एक चम्मच खाने का तेल डाल कर थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए परांठे के आटे जैसा गूंथ लीजिए। गुंथे हुए आटे को गीले कपड़े से ढक कर दस से पंद्रह मिनट के लिए रख दीजिए।
कुकर को खोल कर मूंगफली वाली कटोरी को बाहर निकाल लीजिए और उबली हुई दाल को मथानी या ब्लेंडर से मथ लीजिए।
अब कड़ाही में एक चम्मच देसी घी गरम कीजिए। उसमें राई, जीरा और लाल मिर्च का तड़का दीजिए। तड़का तैयार हो जाए तो उसमें एक चम्मच धनिया पाउडर और चाहें तो थोड़ी-सी कुटी हुई लाल मिर्च भी डाल दें। फिर मथी हुई दाल और मूंगफली के दाने डाल दीजिए। इसमें थोड़ा और पानी मिला लें और एक से डेढ़ चम्मच चीनी डाल कर मद्धिम आंच पर दाल को पकने दीजिए।
अब गुंथे हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना कर रोटी की तरह बेल लें। इन रोटियों को बरफी के आकार में छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। ये ढोकली हैं।
दाल उबलनी शुरू हो जाए तो एक-एक रोटी के कटे हुए टुकड़ों को डालते जाएं। टुकड़ों को डालते समय दाल को चलाते रहें, ताकि ढोकली आपस में चिपकने न पाए। फिर जब ढोकली पक जाएं और दाल गाढ़ी हो जाए तो आंच बंद कर दें। बारीक कटे धनिया पत्ता से सजा कर दाल ढोकली परोसें।
स्वादिष्ट, सुपाच्य दाल ढोकली चाहें तो नाश्ते में खाएं या दोपहर या रात के भोजन के रूप में, आनंद भरपूर आएगा।
की यानी घिया एक ऐसी सब्जी है, जो हर जगह और हर मौसम में उपलब्ध होती है। इसे पकाने में तेल और मसालों की बिल्कुल जरूरत नहीं होती और इसमें अनेक औषधीय गुण होते हैं। खासकर मधुमेह और मोटापे से परेशान लोगों के लिए यह सब्जी दवा से कम नहीं होती।
लौकी को अंकुरित मूंग के साथ पकाएं और देखें इसका लाजवाब स्वाद।
मूंग को अंकुरित करके रखें। एक कटोरी अंकुरित मूंग लें। आधी लौकी का छिलका उतार कर छोटे टुकड़ों में काट लें।
कुकर में एक चम्मच देसी घी गरम करें। उसमें जीरे का तड़का दें। उसमें कटी लौकी छौंकें। ऊपर से अंकुरित मूंग डालें और जरूरत भर का नमक डाल कर कुकर का ढक्कन लगा दें। आंच धीमी रखें। एक से दो सीटी तक पकाएं।
इस सब्जी में और कुछ डालने की जरूरत नहीं होती। अगर आप चाहें तो खाते समय हरी मिर्चें काट कर डाल सकते हैं।
रोटी के साथ खाएं या वैसे ही नाश्ते के रूप में खाएं, यह फटाफट बनने वाला कम घी वाला, अपने आप में संपूर्ण और सुपाच्य आहार है। ल्ल
