आरती सक्सेना

आप अपनी शीघ्र प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘कलंक’ को लेकर क्या कहेंगे। इस फिल्म से जुड़ कर आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

’कलंक एक बेहतरीन कहानी पर बनी फिल्म है, जिसमें मैं घर के मुखिया बलराज चौधरी का किरदार निभा रहा हूं, जो एक दबंग इंसान है। यह एक पीरियड ड्रामा है। मैं इस फिल्म से इमोशनली भी जुड़ा हुआ हूं। क्योंकि इसमें आलिया भट्ट और वरुण धवन हैं, जिनके पिता मेरे अच्छे दोस्त हैं मैंने इन दोनों को अपने सामने बड़े होते देखा है। आज ये मेरे साथ काम कर रहे हैं। इसके अलावा इस फिल्म के निर्माता करण जौहर भी मेरे काफी करीब हैं, क्योंकि इनके पिता से भी मेरे बहुत अच्छे रिलेशन थे, मैं उनको अपने पिता की तरह मानता था। फिर इसमें माधुरी जी भी हैं, जिनके साथ मैं पच्चीस सालों बाद काम कर रहा हूं। लिहाजा, ‘कलंक’ के सेट पर जब मैं जाता था तो मुझे बहुत अपनापन लगता था।

आज की माधुरी और पहले की माधुरी में आपने क्या फर्क पाया?

’सच कहूं तो मुझे माधुरी को देख कर लगा ही नहीं कि मैं उनको पच्चीस साल बाद देख रहा हूं। आज भी वे वैसी ही लग रही हैं, जैसी पच्चीस साल पहले लगती थीं। यहां तक कि उनके स्वभाव में भी मुझे ज्यादा फर्क नहीं लगा। माधुरी मैम को देखने के बाद मुझे लगा कि शायद मैं ही काफी बदल गया हूं। बाकी सब वैसे ही हैं।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि आपकी जिदंगी में काफी सारे बदलाव आए, आपने काफी कुछ सहा। फिर भी आप मजबूत इरादों के साथ सक्रिय हैं।

’हां, आप सच कह रही हैं, मैंने काफी कुछ सहा है। मुझ पर जो कलंक लगा है, उसको मिटाने की कोशिश कर रहा हूं। जब मैं जेल में था तब कई बार टूटते-टूटते बचा था। उस वक्त कई बार तो इतनी निराशा हुई थी कि मैंने आत्महत्या तक करने के बारे में सोचा था। लेकिन फिर मां-पिता का आशीर्वाद और भगवान के रहमो-करम और बीवी के सपोर्ट ने मुझे एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े रहने की ताकत दी। सच कहूं तो मुझे खुद नहीं लग रहा था कि मैं एक दिन फिर से फिल्मों में सक्रिय हो पाऊंगा।

जब आप जेल में एक एक दिन गिन रहे थे और रिहाई के लिए छटपटा रहे थे, उस वक्त कौन-सी ऐसी बात थी, जिसने आपको सब सहने की ताकत दी?

’शुरुआत में जेल में एक एक दिन काटना मुश्किल था। उस वक्त मैं हर दिन सोचता था कि शायद आज मुझे जमानत मिल जाए। उसके बाद जब जमानत नहीं मिलती तो मैं दुखी हो जाता था। उसी दौरान जेल में एक बंदा था, जिसने मुझसे कहा कि जिस दिन मैं किसी भी चीज को लेकर उम्मीद छोड़ दंूगा उस दिन मेरा सब दुख दूर हो जाएगा। लिहाजा उस बंदे की बात मेरे दिल मे घर का गई और उस दिन से मैंने जेल से रिहा होने की उम्मीद ही छोड़ दी। उसके बाद वहां पर एडजस्ट करना आसान हो गया। कहने का मतलब है कि जब हम उम्मीद करते हैं तो ज्यादा दुख पाते हैं।

‘संजू’ फिल्म में दिखाया गया है कि आप मीडिया से काफी नाराज हैं। क्या सचमुच आप मीडिया को दोषी मानते हैं गलत खबरें फैलाने के लिए?

’नहीं… ऐसा नहीं है। मैं मीडिया से बिल्कुल नाराज नहीं हूं और न ही मैं उनको दोषी मानता हूं। मीडिया अपना काम करता है। ‘संजू’ में बस यही दर्शाने की कोशिश की गई है कि मीडिया का काम बहुत जिम्मेदारी का होता है, उसके एक गलत स्टेटमेंट से सामने वाले को काफी बड़ा नुकसान हो सकता है। अगर मीडिया गैरजिम्मेदार हुआ, तो सामने वाले बंदे की जान भी जा सकती है। क्योंकि मीडिया वह पावरफुल जरिया है, जो घर घर तक पहुंचता है और एक इंसान की छवि बनाने-बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाता है। अब जैसे मेरे बारे में आरडीएक्स की खबरें सबने छापी, लेकिन मैं कैंसर पीडितों के लिए, अनाथ बच्चों और एड्स के लिए काम करता हूं, यह किसी ने नहीं छापा। कहने का मतलब है कि मीडिया वही लिखना चाहता है, जो बिकता है। लेकिन बस इतना है कि उसमें सच्चाई हो, झूठ नहीं। क्योंकि अगर झूठ हुआ, तो उसका नुकसान बहुत गहरा होता है। बाकी अगर मीडिया की बात करें, तो मीडिया ने मुझे हमेशा प्यार दिया है, तब भी जब मैं जेल में था, जब मैं नशे में फंसा हुआ था तब भी। और आज भी जब कि मैं फिर से एक बार नार्मल जिंदगी जीने की कोशिश कर रहा हूं।

कहा तो यह भी गया कि ‘संजू’ फिल्म के जरिए राजू हिरानी ने आपकी छवि को सुधारने की कोशिश की है?

’इतने सालों में जब मेरी छवि नहीं सुधरी तो अब क्या सुधरेगी। मेरी छवि मैं खुद ही सुधार सकता हूं, कोई फिल्म नहीं। संजू फिल्म बनाने के पीछे खास मकसद यह था कि मैं लोगों को अवगत कराना चाहता था कि नशे की आदत कितनी बुरी होती है। इसमें से निकलना कितना मुश्किल होता है। इसके अलावा जवानी के जोश में भी सोच-समझ कर काम करने चाहिए। मैं अपने जरिए युवकों को सही मार्गदर्शन करना चाहता था, ताकि मेरी हालत देख कर वे कुछ अच्छा सीखें।

आपको ज्यादातर फिल्मों में गैंगस्टर का रोल मिलता है, जैसे ‘वास्तव’, ‘साहब बीवी और गैंगस्टर’ आदि। इसके पीछे कोई खास वजह?

’शायद मेरी शक्ल और पर्सनाल्टी गैंगस्टर वाले किरदार के लिए मैच होती है, इसलिए मुझे ऐसे रोल ज्यादा मिलते हैं। लेकिन भले ही मैंने कई फिल्मों में गैंगस्टर का किरदार निभाया है, लेकिन हर फिल्म में अलग तरह का है। जैसे ‘वास्तव’ में इमोशनल गैंगस्टर था। ‘साहब बीबी और गैंगस्टर’ में रोमांटिक गैंगस्टर था। इसी तरह कुछ फिल्मों में मैंने कॉमेडी गैंगस्टर की भी भूमिका निभाई है।

आपकी जिंदगी में दोस्तों की बहुत अहमियत रही है। आपके साथ जो एक बार दोस्ती करता है, वह हमेशा दोस्त रहता है। दोस्ती को लेकर आपका क्या फंडा है?

’अरे, दोस्तों के बगैर जीवन जीवन ही नहीं है। दोस्त नहीं, तो कुछ नहीं। मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे दोस्तों का बहुत अच्छा सपोर्ट मिला है। राजू हिरानी जैसे दोस्तों ने मेरा इंतजार किया है कि वे जब भी मुन्नाभाई सीरीज बनाएंगे, मेरे साथ ही बनाएंगे। इसी तरह बॉलीवुड में सलमान, आमिर और शाहरुख, जैकी श्राफ, गोविंदा सभी मुझसे बहुत प्यार करते हैं। इसके अलावा मेरे कई ऐसे प्यार करने वाले दोस्त भी हैं, जो फिल्म इंडस्ट्री से नहीं जुड़े हैं, एक आम इंसान की जिंदगी जी रहे हैं। प्यार के मामले में मैं बहुत लकी रहा हूं। मुझे अपनी बहनों, बच्चों, पत्नी, आप सभी मीडिया वालों और दर्शकों का हमेशा प्यार मिला है। बस मैं भविष्य में और अच्छा काम करना चाहता हूं, ताकि मेरे प्रति लोगों का प्यार बरकरार रहे।