भोजन विषाक्तता यानी फूड प्वाइजनिंग एक ऐसी समस्या है, जिस पर भारत में अधिक ध्यान नहीं दिया जाता, जबकि सच यह है कि लोगों को सबसे ज्यादा परेशानियां दूषित भोजन खाने से होती हैं। दरअसल, समस्या यह है कि जिस चीज से हम अपना पेट भरते हैं उसे कभी बीमारी का स्रोत मान ही नहीं पाते। साफ हाथों से भोजन न खाना, बासी भोजन खाना, अधपका खाना, पके हुए भोजन को ढक कर न रखना आदि वे समस्याएं हैं जिनसे फूड प्वाइजनिंग यानी भोजन विषाक्तता होती है। भोजन विषाक्तता केवल पके हुए भोजन से नहीं होती, बल्कि कच्ची सब्जियों और मांस से भी होती है। खाद्य विषाक्तता बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी आदि द्वारा दूषित किए गए भोजन से होती है। खाद्य जनित बीमारियों की समस्या गर्मी के मौसम में अधिक बढ़ जाती है। साथ ही यह बीमारी बच्चे, बूढ़े या नौजवान किसी को भी हो सकती है। खाद्य विषाक्तता होने पर जी मितलाना, उल्टी आना, पेट दर्द के साथ ऐंठन, दस्त, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में दूषित भोजन के कारण 4.2 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है।
ऐसे बचें
विषाक्त भोजन हमारी पाचन क्रिया को भी प्रभावित करता है। यह विषाक्तता उत्पादन, प्रसंस्करण या खाना बनाने के दौरान किसी भी स्तर पर हो सकती है। वैसे तो भोजन विषाक्तता से कुछ ही दिनों में निजात पाई जा सकती है, लेकिन अगर इसके लक्षणों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो समस्या गंभीर हो सकती है। खाद्य जनित बीमारियों से बचने के लिए निम्न उपायों को अपनाया जा सकता है।
रसोई को रखें साफ
रसोई की सफाई में बहुत बार हम लापरवाही करते हैं। मसलन, सब्जी काट कर चाकू धोकर न रखना, मांस या सब्जी काटने के बाद चॉपर को न धोना या फिर हाथों को न धोना आदि वे कारण हैं, जिनसे खाद्य विषाक्तता हो सकती है। इसके अलावा रसोई में कई ऐसे भयानक जीवाणु होते हैं, जो खाने के जरिए पेट में जाते हैं। किचन में लगे एग्जॉस्ट फैन पर भी धूल जम जाती है, जिसे समय-समय पर साफ करना चाहिए, नहीं तो वह खाने में आती है।
पीने का पानी
पीने का पानी अगर साफ न हो, तो डायरिया और दस्त जैसी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं। खाद्य जनित बीमारियों में डायरिया और दस्त भी होते हैं। कई बीमारियों को फैलाने वाले सूक्ष्म जीव पानी में होते हैं। इसलिए जरूरी है कि पीने का स्वच्छ पानी पीएं। खाद्य विषाक्तता में कमजोरी भी महसूस होती है। इससे बचने के लिए नियमित 7-8 गिलास पानी पीएं। शरीर में पानी की सही मात्रा से रक्त संचार सही बना रहता है।
हाथों की सफाई
अगर साफ हाथों से खाना खाया या बनाया जाता है तो खाद्य जनित बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है। शौच जाने या बाहर से घर में आने पर साबुन से हाथ जरूर धोने चाहिए।
हरी सब्जियां
हरी सब्जियों के सेवन से उनमें विषाक्तता आने के जोखिम कम हो जाते हैं। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि आप प्रोसेस्ड फूड का प्रयोग न करें। क्योंकि उनमें पौष्टिक तत्त्व और फाइबर कम होता है। ऐसे भोज्य पदार्थों से जितना परहेज रखें, उतना अच्छा है। इनके बजाय ताजा सब्जियां खाएं।
रेफ्रिजिरेटर से बचें
अक्सर समय की कमी की वजह से हम एक साथ पूरे हफ्ते की सब्जियां और फल खरीद कर रेफ्रिजिरेटर में रख देते हैं। इससे फलों और सब्जियों का ताजापन खत्म हो जाता है और पौष्टिक तत्त्व भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए रेफ्रिजिरेटर से बचना चाहिए।
सावधानियां
’ हमेशा ताजा बना हुआ भोजन ही खाएं।
’ ताजे फलों और सब्जियों का सेवन करें।
’ एक बार में भरपेट भोजन न करें।
’ बचे हुए भोजन को एअरटाइट कंटेनर में बंद करके फ्रिज में रखें।
’ चौबीस घंटे से अधिक देर का पका भोजन न खाएं।
