मीना
ऋषभ और रीना की शरारतों से उनकी मां बहुत तंग हो गई हैं। वे कहती हैं कि जब तक ये स्कूल जाते हैं, तब तक तो घर में शांति रहती है, लेकिन जैसे ही छुट्टियां श्ुरू हो जाती हैं, ये बच्चें तो घर सिर पर उठा लेते हैं। मैं तो इनको संभालते-संभालते परेशान हो जाती हूं। यह परेशानी केवल रेखा की नहीं है, बल्कि गर्मी की छुट्टियों में ज्यादातर माता-पिता का यही हाल रहता है। इन छुट्टियों में बच्चों को संभालना उन अभिभावकों के लिए और बड़ी चुनौती होती है, जो कामकाजी हैं। गर्मी की छुट्टियों में अगर बच्चों को घर के बाहर खेलने-कूदने जैसी कुछ गतिविधियां न कराई जाएं तो बच्चे घर में टीवी पर कार्टून देख-देख कर बोर हो जाएंगे। इसलिए बेहतर है कि इन छुट्टियों में बच्चों को गृहकार्य कराने के साथ कुछ ऐसे गुर सिखाएं, जो उन्हें हमेशा काम आते रहें।
बच्चों की रुचि जानें
हर बच्चे में कोई न कोई हुनर होता है। इसलिए सबसे पहले अपने बच्चे के हुनर को पहचानें और उसे उसका प्रशिक्षण दिलाएं। बच्चों को खुद फैसला करने दें कि उन्हें छुट्टियों में क्या सीखना है। अभिभावक होने के नाते उन पर अपनी रुचि थोपने की कोशिश न करें।
कम्प्यूटर
आजकल कम्प्यूटर के बहुत अत्याधुनिक पाठ्यक्रम शुरू हो गए हैं। अगर आपके बच्चे में कम्प्यूटर या तकनीक को लेकर दिलचस्पी है, तो उसे यह जरूर सिखाएं। कम्प्यूटर कोर्स तो कॉलेज जाने वाले विद्यार्थी भी कर सकते हैं, पर छोटे बच्चों को अगर कुछ भी न मालूम हो तब भी कम्प्यूटर की मूलभूत जानकारी तो उन्हें होनी ही चाहिए। ताकि बच्चा तकनीक के साथ कदमताल करता रहे। इससे आने वाली पीढ़ी भी तकनीकी रूप से सक्षम होगी और देश में नए आविष्कार होंगे।

तैराकी
तैराकी कला बड़ी अनोखी है। यह किसी को मुसीबत से तो बचाती है तो साथ ही बच्चे में आत्मविश्वास भी लाती है। यह व्यायाम का बेहतरीन साधन भी है। गर्मी की छुट्टी अभी बाकी हैं, इसलिए आपके पास अब भी मौका है तैराकी सीखने का। यह एक ऐसी कला है, जो जीवन में कभी भी आपको काम आ सकती है। अगर आपके बच्चे का मन खुश नहीं है और तैराकी उसका पैशन है तो वह इसे करके खुश हो सकता है।
भाषा-कौशल
भाषा का एक बड़ा व्यापार तैयार हो रहा है और चूंकि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है, इसलिए यहां भाषा के क्षेत्र में व्यापार की संभावना हमेशा बनी रहती है। तो अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा किसी भाषा को जल्दी सीख सकता है, तो उसे इन छुट्टियों में उस भाषा का प्रशिक्षण दिलाएं। वैसे अमूमन देखा गया है कि इस देश में ज्यादातर युवा अंग्रेजी सीखना चाहते हैं। जब उन्हें अंग्रेजी बोलने नहीं आता, तो वे खुद को अन्य के मुकाबले में कमजोर समझने लगते हैं। उनका आत्मविश्वास खत्म होने लगता है। बच्चों में यह कमी न हो इसके लिए आप उन्हें अंग्रेजी सीखने के कुछ पाठ्यक्रम करा सकते हैं। यह कौशल उन्हें हमेशा काम आएगा। यह जरूरी नहीं है कि आप बच्चे को अंग्रेजी ही सीखाएं। जिस भाषा को सीखने में बच्चे की रुचि हो वही भाषा उसे सीखाएं। जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश, चीनी, रूसी आदि भाषाएं सिखाने के केंद्र आजकल हर बड़े शहर में खुल गए हैं। वहां अपने बच्चे को भेज सकते हैं।
नृत्य और नाटक
नाटक एक ऐसी कला है, जो हर बच्चे में होती है। दरअसल, बच्चों को मालूम होता है कि उन्हें अपनी बात कैसे मनवानी है। माता-पिता से अपनी बात मनवाने के लिए वे न जाने कितने तरह के नाटक करते हैं। कभी फोन खरीदवाना है, तो माता-पिता को मस्का लगाएंगे, तो कभी कपड़े खरीदवाने हैं तो आपको मनाएंगे। बच्चों में थियेटर का मूल गुण बचपन से ही होता है। अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे की थियेटर में रुचि है, तो उसे इन छुट्टियों में थियेटर की कक्षाएं जरूर दिलाएं। आजकल नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह एक कमाई का जरिया भी है। नृत्य साधना भी है और अपने भावों को प्रकट करने की कला भी। अगर आपके बच्चे में नृत्य का हुनर या उसे शौक है तो नृत्य की कक्षा में उसे भेजें।

बागवानी
बच्चे पर्यावरण के बारे में केवल किताबों में पढ़ते हैं। असल जीवन में उन्हें प्रकृति के बारे में बहुत जानकारी नहीं होती। बच्चों को प्रकृति प्रेमी बनाने के लिए बागवानी सिखाएं। इससे बच्चे प्रकृति और पर्यावरण के बारे में तो समझेंगे ही साथ उनके मन को भी सुकून मिलेगा। इसके साथ ही गर्मी से हम सबको राहत मिलेगी।
पढ़ने में भी रुचि बनाए रखें
ऐसा भी न हो कि बच्चा छुट्टियों में केवल मौज-मस्ती करता रह जाए। उसे पढ़ने के लिए कुछ अच्छी कहानियों या कॉमिक की किताबें भी लाकर दें। वहीं युवा छात्र जो कॉलेज जाते हैं, वे भी कुछ अच्छा साहित्य पढ़ कर अपने ज्ञान का विस्तार कर सकते हैं। ऐसा करने से पढ़ाई की आदत भी बनी रहती है। एक निजी स्कूल में पढ़ाने वाली नेहा का कहना है अगर बच्चों को छुट्टियों में गृहकार्य न दिया जाए तो उनकी पढ़ने की आदत खत्म होने लगती है। दूसरा उनका पूरा ध्यान सिर्फ खेल में रहता है। यही कारण है कि बच्चे जब छुट्टियों से वापस स्कूल आते हैं, तो हमें उन्हें पढ़ाने में कुछ समस्या रहती है। कुछ समय तो वो छुट्टी के मूड में ही रहते हैं। इसलिए हमें बच्चों को गृहकार्य देना अनिवार्य हो जाता है।
समय सारणी
छुट्टियों का सदुपयोग तभी हो सकता है जब बच्चे की पूरी दिनचर्या की समय सारणी हो। ताकि बच्चा समय पर अपना काम करे और स्कूल खुलने पर शिक्षक यह शिकायत न कर पाएं की बच्चा बत्तमीज हो गया है। दरअसल, जैसे ही छुट्टियां खत्म हो जाती हैं तब कुछ शिक्षक यह भी शिकायत करते हैं कि बच्चा पहले पढ़ने में अच्छा था और समय पर काम कर लेता था, पर अब नहीं करता। तो अगर आप बच्चे की समय सारणी छुट्टियों में भी बना कर रखेंगे, तो बच्चे की स्कूल से भी शिकायत नहीं आएगी।

