अनीता सहरावत
आप हमेशा एक ही खाना खाते हैं? भले वह आपका पंसदीदा पकवान क्यों न हो। या किसी खास पंसदीदा पोशाक को रोजाना पहनते हैं। नहीं न! बेशक ये सवाल आपको अटपटा लगें, मगर हम अपने घर के साथ कुछ ऐसा ही करते हैं। घर बनाने, पुताई करीने के बाद एक बार सामान जहां लगा दिया वह उसकी स्थाई जगह बन जाती है। पुताई का रंग हम भले बदल लें, पर घर का सही मायनों में मेकओवर दोबारा सालों-साल इंतजार ही करता रह जाता है। घर हमारा वह पड़ाव है, जहां दिन-भर की थकान के बाद हम सुकून की सांस लेते है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि घर जाकर उन्हें बोरियत होने लगती है, जिसके चलते वे ज्यादा समय आॅफिस में या बाहर ही गुजारते हैं और घर रैनबसेरा बनने लगता है। इसलिए घर में ताजगी बनाए रखने के लिए जरूरी हैं कि साज-सज्जा में फेरबदल जल्दी हों। थोड़े-थोड़े अंतराल में घर की बाहरी और भीतरी सजावट को भी बदलते रहें। लेकिन घर के मेकओवर का जिक्र आते ही सबसे पहले हमें बजट की चिंता सताती है। चलिए आज बात करते हैं कुछ ऐसे आसान और सस्ते बदलावों की, जो महंगें भी न हों और घर की भी कायापलट हो जाए।
दीवारों का रंग
दीवारें, घर का सबसे जरूरी हिस्सा, लेकिन बदलाव के मामले में अक्सर अनदेखी का शिकार होती हैं। अगर दीवारें खराब न हों तो पूरे घर का पेंट बदलने के बजाय हर कमरे की एक दीवार का रंग बदल दें। ऐसा रंग चुनें जो बाकी दीवारों के रंग के साथ संतुलित हो जाए। साथ ही दीवार पर टेक्सचर्स डिजाइन भी ले सकते हैं। इसके अलावा आजकल बाजार मे वालआर्ट की अनगिनत श्रेणियां मौजूद हैं, जिसमें से आप अपनी जेब और जरूरत के हिसाब से डिजाइन चुन सकते हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फोटो-फ्रेम, पेंटिग्ंस को भी नई जगह जरूर दें।
पौधे
पौधे अपने आप में एक पूरी सजावट हैं। फिर चाहे आप इन्हें खाली कोने में जगह दें या सोफे की बगल में सजाएं, दीवारों और कोनों के खालीपन को छायादार पौधे बड़ी आसानी से समेट लेते हैं। किफायती होने के साथ-साथ इनका रखरखाव भी कोई मुश्किल काम नहीं है और ये ज्यादा खर्चीले भी नहीं होते, तो बालकनी और कमरों के पौधों को मौसम के हिसाब से बदल सकते हैं।
चूंकि हम बात कर रहे हैं सस्ते और किफायती मेकओवर की, तो इसमें सबसे खास भूमिका होगी आपके स्टोर रूम की। स्टोर रूम में अक्सर ऐसा सामान भरा रहता है, जिसे न तो हम इस्तेमाल कर पाते हैं और न ही इसे फेंका जा सकता है। अगर आपका स्टोर रूम भी पुराने खिड़की, दरवाजे, टेबल के कबाड़ से अटा है, तो अब बारी है कबाड़ को काम पर लगाने की। पुराने खिड़की, दरवाजों के पैनल को नया अंदाज दीजिए। खिड़कियों के फोटो फे्रम और टेबल बेस बना सकते हैं। वहीं दरवाजे और शटर पैनल का पलंग पर सिरहाना इसे एक बिल्कुल नया और क्लासी अंदाज देगा। कई सामान टूट-फूट जाने या पुराने हो जाने की वजह से कोने में सरक जाते हैं। इसका भी बड़ा आसान-सा उपाय आप कर सकते हैं। पुरानी और खराब पड़ी स्टडी टेबल को खिड़की के पास खाली दीवार के साथ लगा कर सिर्फ एक फूलदान से सजा कर ही नया रूप दे सकते हैं। बतौर लेपटॉप या अखबार मेज भी इस्तेमाल कर सकते हैं। डाइनिंग या पुरानी पड़ी किचन टेबल को कॉॅफी टेबल बनाइए। मेज के टूटे-फूटे हिस्सों को रिपेयर भी कर सकते हैं, लेकिन अगर इनके रिपेयर पर खर्चा नहीं करना चाहते तो इनके टूटे और कटे हिस्सोें को फिनिशिंग करके पैना अंदाज दे सकते हैं। यह अंदाज भी आजकल खूब चलन में है।
सजावटी सामान
इसके अलावा घर में बेतरतीब से इधर-उधर रखे सजावटी सामान और एंटीक चीजों को एक साथ लाएं। ड्राइंग या लिविंग रूम की किसी भी एक पूरी दीवार का फ्रेम डिजाइन बनवा कर इस सारे सामान को व्यवस्थित करें। यह न केवल देखने में शानदार होगा, बल्कि इससे बाकी कमरों में भी जगह बनेगी। कई बार छोटे-छोटे साधारण से बदलाव भी काफी असरदार हो सकते है। कांच, प्लास्टिक की बोतलें और जार हम सबके घरों में इस्तेमाल होते है, इन्हें अपने पंसदीदा स्प्रे पेंट, जूट या चमकीले पाउडर से सजा कर उम्दा बना और दिखा सकते हैं।
रोशनी
रोशनी सज्जा का सबसे खास पहलू है, जिसे आमतौर पर हम अनदेखा करते हैं। बेहतरीन लाइटिंग आम-सी सजावट को उभार सकती है और बढ़िया से बढ़िया खूबसूरती को बेकार लाइटिंग डुबो भी सकती है। सज्जा में रोशनी की भूमिका उतनी ही है, जितनी दुल्हन के माथे पर बिंदी की। दुल्हन की पूरी सज्जा एक बिंदी के बिना अधूरी ही रहती हैं। ठीक वैसे ही रोशनी के बिना घर का मेकओवर आधा ही रहेगा। घर सजाते हुए इस बात का ख्याल रखना बेहद जरूरी है कि कमरों के आकार, रंग और साजो-सामान के हिसाब से ही लाइटिंग का चुनाव भी करें। जरूरी नहीं कि मंहगें झूमर ही लटकाए जाएं या बड़े-बड़े लैंप ही सजाए जाएं, बाजार में सस्ते और बेहतरीन लाइटिंग डिजाइन के भी ढेरों विकल्प आसानी से मिल जाएंगे।
सबकी रुचि का रखें खयाल
सबसे खास बात घर ही वह जगह है, जहां हम अपने शौक पूरे करते हैं। घर के मेकओवर में अपनी और घरवालों की पसंद को पहली प्राथमिकता दें। हर किसी को नृत्य, संगीत या अन्य कला में रुचि जरूर होती है। हरेक के शौक से जुड़ी चीजें और तस्वीरें उनके कमरों में लगा सकते हैं। घर अगर छोटा है तो भी ड्राइंग रूम या दूसरे कमरे में बारी-बारी सबकी पसंद को जगह दे सकते हैं। लेकिन जरूरी नहीं कि आप यह सारा बदलाव एक ही बार करें। मेकओवर की पूरी प्रक्रिया अपने बजट, समय और सहूलियत के मुताबिक ही करें। बजट की चिंता न हो तो इस पेशे के पारंगत लोगों की भी मदद ले सकते हैं। यानी घर को मौके नहीं, मूड के हिसाब से सजाइए। अपने घर को मेहमानों के लिए नहीं, खुद के लिए तैयार करिए।
फर्नीचर
दीवारों के बाद बारी आती है फर्नीचर की। सामान की जगह जरूर बदलें, क्योंकि इसमें फेरबदल के बिना आपको खुद ही बदलाव महसूस नहीं होगा। सामान के आकार और जगह के हिसाब से आप कमरों में भी फेरबदल कर सकते हैं। लिविंग रूम को ड्राइंग रूम, बेडरूम से अदल-बदल कर सकते हैं। यह पूरी तरह आपकी सहूलियत पर निर्भर है। अक्सर हम सामान की जगह अपने दिमाग में पक्की कर लेते हैं कि फलां चीज यहीं सही है। लेकिन इस बार सोच के खांचे में सामान को खिसकाइए और यकीनन यह बदलाव औरों को ही नहीं, आपको भी पंसद आएगा। इसके बाद कमरों के परदों, सोफा कवर, बेडशीट का मेकओवर जरूर करें। यह काम हम अक्सर त्योहारों, मेहमानों के आगमन, खास मौकों के लिए ही बचा कर रखते हैं। क्या आपको याद है कि अपनी पंसद के लिए आपने पिछली बार कब इनमें बदलाव किया था? कोशिश करें कि ज्यादा मंहगे और भारी-भरकम साजो-सामान से बचें। साथ ही मौसम के हिसाब से कपड़ों का चुनाव करें। आजकल कमरों के रंगों से मेल खाता ही सोफा-साजी का भी स्टाईल और रंग रखने का चलन है।
