अगर सोने का तरीका ठीक न हो तो हमारे स्वास्थ्य पर उसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा हमारे व्यक्तित्व और सोचने-समझने की स्थिति पर भी उसका असर पड़ता है। दिन भर की थकान के बाद रात को नींद सुखमय होनी चाहिए। जितना जरूरी है आठ घंटे की अच्छी नींद लेना उतना ही जरूरी है कि हम सही अवस्था में सोएं। सही अवस्था में न सोने से बदन, पीठ और सिर में दर्द की शिकायत रहने लगती है। इसके अलावा पेट संबंधी कई बीमारियां हो जाती हैं। शरीर चुस्त-दुरुस्त भी नहीं रहेगा।
सोने की दिशा
उत्तर दिशा की तरफ सिर करके नहीं सोना चाहिए। यह कोई मिथ नहीं, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है। शरीर एक चुंबक की तरह होता है, जिसका सिर की तरफ का भाग धनात्मक और पैर की तरफ का हिस्सा ऋणात्मक आवेश वाला होता है। इसी तरह उत्तर दिशा धनात्मक और दक्षिण दिशा ऋणात्मक आवेश वाली होती है। जब आप कंपास यानी दिशा मापी रखते हैं तो भी इसका खुलासा होता है। और आप यह भी जानते हैं कि धनात्मक आवेश वाले हिस्से की तरफ चुंबक का धनात्मक आवेश वाला हिस्सा करते हैं तो वह उससे दूर भागता है, उसे धक्का देता है। इसी तरह जब आप उत्तर की तरफ सिर करके सोते हैं तो आपके सिर के खून का प्रवाह प्रभावित होता है। इसलिए दक्षिण की तरफ सिर करके सोना उचित रहता है।
तकिए का चुनाव
सोते समय तकिए का सही चुनाव जरूरी है। अधिक मोटा और ऊंचा तकिया रख कर सोने से गर्दन की हड्डी में खिंचाव आता है, जिससे स्पांडिलाइटिस की समस्या हो सकती है। इससे सिरदर्द और रीढ़ की हड्डी में दर्द बना रह सकता है। इसलिए तकिया जहां तक हो सके, नरम और पतला रखें।
पीठ के बल सोएं
सोने का सबसे सही तरीका पीठ के बल होता है। पीठ के बल सोने पर सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी आदि जैसे अंग सामान्य अवस्था में रहते हैं, जिससे आपको बहुत अच्छी नींद आती है और उस तरह से सोना सेहत के लिए भी लाभदायक होता है। इसे लोग कई बार स्टारफिश की अवस्था भी बोल देते हैं। इस अवस्था में आपके दोनों पैर सीधे और दोनों हाथ ऊपर आपके तकिए के पास होते हैं। पीठ के बल पर सोने वाले लोगों को स्वास्थ्य लाभ भी होता है। जो लोग पीठ के बल सोते हैं, अगर वे अम्ल जमाव यानी एसिड रिफ्लक्स से पीड़ित हैं या झुर्रियों को रोकना चाहते हैं तो यह एक संतुलित और अच्छी अवस्था है। अगर आपके कंधों में दर्द होता है तो इस अवस्था में न सोएं।
बार्इं करवट सोएं
अगर आप बार्इं ओर करवट लेकर सोते हैं तो आपके स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है। बार्इं ओर सोने से खून का बहाव सही तरीके से होता है और नींद भी अच्छी आती है। इस तरह सोने वाले लोगों की संख्या अधिक है। चिकित्सक भी बार्इं ओर सोने की सलाह देते हैं। अगर आप दार्इं ओर करवट लेकर सोते हैं तो आपके लिवर, पेट, फेफड़े और दिल पर तनाव बढ़ता है। बार्इं ओर करवट करके सोने से खाना पचने में आसानी होती है, और इससे आपके पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता। इससे शरीर में जमा होने वाला जहरीला तत्त्व- टॉक्सिन लसिका तंत्र के माध्यम से निकल जाता है। अगर आप बार्इं ओर करवट लेकर सोते हैं तो इससे पेट का अम्ल ऊपर की बजाय नीचे की ओर जाता है, जिससे एसिडिटी और सीने में जलन की समस्या नहीं होती है।
पेट के बल न सोएं
अक्सर कई लोगों को पेट के बल सोने में आराम मिलता है। इस तरह उन्हें सोने की आदत पड़ जाती है। मगर बता दें कि पेट के बल लेटना या सोना सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं होता, क्योंकि इस अवस्था में सोने से सिर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी अपनी सामान्य अवस्था में नहीं रहती है। इस तरह सोने से शरीर और जोड़ों में दर्द भी हो सकता है, इसलिए इस अवस्था में न सोएं। पैरों को मोड़ कर न सोएं बहुत से लोग सीने की तरफ पैरों को मोड़ कर सोते हैं। इस अवस्था में सोना सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदेह है। इससे गर्दन और पीठ में दर्द रहने लगता है, इसके अलावा छाती पर भी बुरा असर पड़ता है।
अच्छी नींद के लिए
कई बार किसी चिंता या असंतुलित भोजन की वजह से रात को समय से नींद नहीं आती, बेचैनी बनी रहती है। इसलिए अच्छी नींद के लिए शवासन में सोने का अभ्यास करें। पीठ के बल बिल्कुल सीधा लेट जाएं। हाथों को भी शरीर के समांतर सीधा रखें। शरीर को बिल्कुल ढीला छोड़ दें। फिर आंखें बंद करके पैर के दोनों अंगूठों पर ध्यान केंद्रित करें। सोचें कि अंगूठे भारी हो गए हैं, जैसे उन पर भारी पत्थर बंधे हों। उन्हें हिलाना-डुलाना मुश्किल है। इसी तरह धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ते रहें। अनुभव करें कि आपका पूरा शरीर शिथिल पड़ गया है। इस कदर शिथिल पड़ गया है कि आप उसे चाह कर भी हिला-डुला नहीं सकते। फिर महसूस कीजिए कि आप धीरे-धीरे गहरी नींद में जा रहे हैं। इस तरह न सिर्फ अच्छी और गहरी नींद आती है, बल्कि शरीर भी स्वस्थ रहता है।

